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छात्रवृत्ति घोटाला :  1.93 करोड़ वसूलने की तैयारी, आरसी जारी 

Thu, 25 Aug 2016 11:47 AM IST
नगेश शर्मा/अमर उजाला/मुरादाबाद
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घोटाला - फोटो : demo
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सीडीओ और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी दस्तखत से सरकारी बैंक खातों से छात्रवृत्ति के 1.93 करोड़ रुपये उड़ाने के मामले में अब रकम वसूलने की तैयारी कर ली गई है। इसके लिए घोटाले के आरोपी पूर्व संविदा कंप्यूटर आपरेटर और दो स्कूल प्रबंधकों के खिलाफ आरसी जारी की गई हैं। 
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 इस मामले में बनाई गई हाई लेवल इंक्वायरी कमेटी ने घोटाले के सबूत एकत्र किए हैं। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही इस मामले में कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी की जा सकती है। घोटाले में एसबीआई बैंक के चार शाखा प्रबंधक भी आरोपी हैं। बताया जाता है कि इस मामले के आईओ की जांच में महकमे से जुडे़ कई अन्य लोगों के नाम भी प्रकाश में आ रहे हैं, जिसने नाम एफआईआर में शामिल किए जा सकते हैं।

इस वर्ष जून माह के अंतिम दिनों में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में छात्रवृत्ति के 1.93 करोड़ रुपये हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया था। समाज कल्याण विभाग के सरकारी बैंक खाते से यह रकम सीडीओ और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षरों के जरिए नवंबर 2015 से लेकर जनवरी 2016 के बीच ट्रांसफर की गई थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने जांच शुरू कराई।
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आनन-फानन में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी विकास मिश्रा ने पूर्व संविदा कंप्यूटर आपरेटर राहुल कुमार, धर्मानंद भटनागर, सुरेंद्र सिंह, एसबीआई बैंक की सिविल लाइन, करुला शाखा, पीली कोठी शाखा, भोजपुर शाखा के प्रबंधकों के खिलाफ धोखाधड़ी कर सरकारी धन का गबन करने की रिपोर्ट दर्ज करा दी। डीएम ने जांच के लिए हाई लेवर इंक्वायरी कमेटी गठित की। जिसमें सीडीओ, डीडीओ, एडीएम, चीफ ट्रेजरी ऑफीसर और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को शामिल किया गया। कमेटी ने घोटाले से संबंधित सबूत एकत्र किए। अब कंप्यूटर आपरेटर राहुल कुमार, स्कूल प्रबंधक धर्मानंद भटनागर और सुरेंद्र सिंह से घोटाले की धनराशि वसूलने के लिए आरसी जारी की गई हैं। 

इन स्कूलों के खातों में पहुंची थी रकम
1- आदर्श पब्लिक जूनियर हाईस्कूल भोजपुर धर्मपुर
2- आनंद पब्लिक स्कूल नाखूनका
3- आदर्श पब्लिक स्कूल मुरादाबाद
4- सकलैनी पब्लिक जूनियर हाईस्कूल कांकरखेड़ा
5- आस्था पब्लिक जूनियर हाईस्कूल


हस्ताक्षरों की जांच कहां तक पहुंची
जिस समय यह मामला उजागर हुआ तो एसएसपी नितिन तिवारी ने कहा था कि सीडीओ और अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के हस्ताक्षर फर्जी हैं या नहीं इसकी जांच हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से कराई जाएगी। यह जांच कहां तक पहुंची इसका खुलासा अभी तक नहीं किया गया है। 


ईओडब्ल्यू को विवेचना दी या नहीं 
नियमों के अनुसार 50 लाख से अधिक के सरकारी गबन के मामले में जांच ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा) द्वारा की जाती है। लेकिन अभी तक इसका जवाब कोई नहीं दे पा रहा है कि क्या यह विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा को दी गई या नहीं। सवाल उठ रहा है कि इतनी ढिलाई क्यों? जबकि घोटाले के खुलासे के समय चर्चा थी कि इस मामले की जांच ईओडब्ल्यू को दी जाएगी।


मामले की जांच जारी है। शीघ्र ही इसमें कार्रवाई भी होगी। महापौर चुनाव आदि के कारण थोड़ी देर हुई है। घोटाले की पूरी रकम वसूल की जाएगी इसके लिए सबूत एकत्र किए गए हैं। 
- राजेंद्र कुमार, डीडीओ एवं जांच टीम के सदस्य


इस मामले में धोखाधड़ी कर सरकारी धन का गबन करने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। घोटाले से जुड़े काफी तथ्य एकत्र कर लिए गए हैं। इस मामले में शामिल रहे सभी लोगों पर शिकंजा कस दिया गया है। शीघ्र ही कार्रवाई होगी। 
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- विकास मिश्रा, अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी
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