पूर्वांचल में कुख्यात अपराधी रहे श्रीप्रकाश शुक्ला ने जिस तेजी के साथ ताबड़तोड़ वारदातों कीं थीं, ठीक उसी तरह वेस्ट यूपी में हिस्ट्रीशीटर मुनीर अपराध की दुनिया का बड़ा नाम बन गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस, एटीएस, एसटीएफ समेत कई एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं। लेकिन ये कुख्यात अपराध सभी को छका रहा है।
मुनीर ने अलीगढ़ में कारोबारी फहद और छात्र नेता आलमगीर की हत्या की। उसके खिलाफ केस दर्ज किए गए। लेकिन पुलिस उसे पकड़ने में कभी कामयाब नहीं हो पाई। सूत्रों की माने तो उसने वेस्ट यूपी में अपना पूरा गैंग खड़ा कर लिया है। बड़े बड़े गिरोह के अपराधी अपने गिरोह से नाता तोड़कर मुनीर के साथ जुड़ चुके हैं।
जो वेस्ट यूपी में लूट, हत्याएं और फिरौती, नकली करेंसी जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। नेशनल जांच एजेंसी के डिप्टी एसपी तंजील अहमद की हत्या में जिस मुनीर का नाम सामने आ रहा है। वह भी मूलरूप से डीएसपी तंजील के पैतृक गांव सहसपुर का ही निवासी है। बारहवीं तक की पढ़ाई मुनीर ने स्योहारा के एक इंटर कालेज से की थी।
सूत्रों की माने तो मुनीर बचपन से ही अपराधी मानसिकता का रहा है। स्योहारा में पढ़ाई के दौरान छात्रों के बीच हुए झगड़े में भी मुनीर ने गोली चलाई थी। लेकिन मुकदमेबाजी न होने के कारण मुनीर वहां से बच निकला था। बारहवीं की परीक्षा में नकल करने से रोकने पर एक टीचर पर तमंचा तान दिया था। इसके बाद वह अलीगढ़ चला गया था।
यहां उसने एएमयू में छात्रों के बीच रहकर अपनी पैठ बनाई। यहां उसके बैग में किताबों से ज्यादा हथियार और कारतूस रहते थे। मामूली विवाद में भी ताबड़तोड़ फायर कर देता था। उसने अलीगढ़ में कारोबारी फहद की हत्या की। उसके खिलाफ केस दर्ज किया गया। लेकिन पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पाई। बाद में सहारनपुर के आलमगीर की हत्या कर दी।
अपराध की दुनिया में बड़ा नाम बन चुके मुनीर पर पुलिस ने केवल पांच हजार रुपये का ईनाम घोषित है। पुलिस विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी की माने तो ऐसे अपराधी पर तो पचास हजार रुपये का ईनाम भी कम है। उत्तर प्रदेश पुलिस, एटीएस, एसटीएफ समेत कई एजेंसियां उसकी तलाश में जुटी हैं। लेकिन मुनीर किसी के हाथ नहीं लग पा रहा है।