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नेत्रहीन मासूम बेटे को स्टेशन पर छोड़ गई पत्थर दिल मां

Sun, 14 Aug 2016 11:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
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अपराध - फोटो : अमर उजाला
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 मासूम बच्चे के लिए मां की ममता ही सब कुछ होती है। लेकिन एक पत्थर दिल मां ने दो साल के नेत्रहीन मासूम को स्टेशन पर छोड़ दिया। दुनिया में आया तो आंखों में बिना रोशनी लिए, जिस मां की गोद उसके लिए सब कुछ थी अब उस मां ने भी ठुकरा दिया। प्लेटफार्म नंबर एक पर मिले बच्चे को जीआरपी ने चाइल्ड लाइन के हवाले कर दिया है। 
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शनिवार को प्लेटफार्म नंबर एक पर महिला आई उसकी गोद में करीब दो साल का बच्चा था। बच्चे को वहीं सीट पर लिटा दिया। थोड़ी देर वह वहीं बैठी रही। इसके बाद वहां से अचानक उठी और चल दी। आसपास बैठे लोगों ने समझा कि शायद बच्चे के लिए पानी या कुछ खाने के लिए लेने गई होगी। लेकिन वह लौटकर नहीं आई। तब लोगों को कुछ शक हुआ तो आसपास महिला को तलाशना शुरू किया, लेकिन वह किधर गई किसी को पता नहीं चला। उनमें से ही एक बुजुर्ग व्यक्ति उसे लेकर जीआरपी थाना पहुंचा।

वहीं ट्रेन में बैठी एक महिला यात्री इस घटना को देख रही थी। उसने 1098 पर सूचना करके घटना की जानकारी दे दी। जीआरपी ने चाइल्ड लाइन को फोन कर दिया। सूचना मिलने के करीब चार घंटे बाद चाइल्ड लाइन वाले उस बच्चे को लेने पहुंचे।
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चाइल्ड लाइन मुरादाबाद की संचालिका श्रद्धा शर्मा ने बताया कि सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई। जिसमें निर्णय लिया गया कि बच्चे को ओपन शेल्टर होम में रखा जाएगा। तीन चार दिनों में कोई उसे पहचानता है तो ठीक है नहीं तो फिर उसे नगीना में बने स्पेशल नीड वाले बच्चों के लिए बनाए गए शेल्टर होम में रखा जाएगा।


अंधता बनी मासूम की दुश्मन 
मुरादाबाद। मां ने किस मजबूरी में उस बच्चे को छोड़ा ये वही जाने, लेकिन उस बच्चे को देखकर तो किसी को भी तरस आ जाए। जिस बच्चे की आंखें ही नहीं उसके लिए जीवन में इससे बड़ी सजा और क्या हो सकती है।
मां ने ममता का खून कर उसे स्टेशन पर भाग्य के भरोसे छोड़ दिया, जोकि उससे पहले से ही रूठा हुआ है। ये भी नहीं सोचा कि उस मासूम के साथ क्या होगा। बच्चे के कपड़े और हालात देखकर अच्छे परिवार से लग रहा है। अंधता ने ही मां को भी उसका दुश्मन बना दिया। 


पालने में ही छोड़ जाती उसे 
मुरादाबाद। केंद्र सरकार की ओर से अपनों से ठुकराए जाने वाले बच्चों के लिए सुनहरा उपहार योजना शुरू की गई है। जिसके तहत चाइल्ड लाइन कार्यालय के बाहर एक पालना रखा गया है। इस पालने में अपने बच्चे को छोड़कर घंटा बजाकर चले जाना है। लेकिन पत्थर दिल मां ने इतना भी नहीं किया और स्टेशन पर छोड़ा। गनीमत रही कि वह चाइल्ड लाइन के पास ही पहुंच गया।

इसी बीच उसे स्टेशन पर आवारा घूमने वाले ले जाते तो उसके साथ और भी बुरा होता। लेकिन इस मासूम को सुनहरा उपहार योजना का भी लाभ नहीं मिलेगा। यह योजना केवल नवजात बच्चों के लिए है। स्टेशन पर मिले बच्चे की उम्र दो साल या उससे अधिक ही है। ऐसे में उसे इस योजना के तहत रखने के बजाय शेल्टर होम में रखा जाएगा। 
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