नारी निकेतन में रह रही एक किशोरी अपने परिजनों से मिलने के लिए व्याकुल है, किशोरी को इंतजार है कि परिजन उनकी गलतियों को भुलाकर उन्हें लेने के लिए आएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ। पुलिस ने किशोरी के परिजनों से संपर्क साधा तो भी परिजन अपनी बेटी को लेने के लिए नारी निकेतन नहीं पहुंचे।
बेटी के घर छोड़कर जाने से दोनाें के बीच गुस्से की दीवार बन गई है, बेटी का कहना है कि मेरे कदम से मां-पिता नाराज हैं।
मामला एक
मुरादाबाद। उड़ीसा की रहने वाली एक किशोरी को दो माह से अधिक का समय नारी निकेतन में रहते हुए हो गया है। किशोरी ने काउंसलिंग के दौरान बताया कि वह किसी के बहकाने पर घर छोड़कर चली गई थी, इसके बाद वह भटकते हुए मुरादाबाद आ पहुंची थी।
परिजनों ने किशोरी से उसके परिजनों के बारे में जानकारी कर उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क साधा तो उन्होंने शुरू में फोन उठाकर बातचीत की लेकिन जब उन्हें बेटी को ले जाने के लिए बुलाया गया तो उन्होंने कॉल काट दी और अब फोन नहीं उठा रहे हैं, अब किशोरी को परिजनों तक पहुंचाने के लिए उड़ीसा पुलिस की मदद मांगी गई है।
मामला दो
मुरादाबाद। सिविल लाइन में लावारिस हालत में मिली एक किशोरी करीब एक माह से नारी निकेतन में रह रही है। उसके परिजन भी मुरादाबाद के देहात क्षेत्र के रहने वाले हैं। किशोरी से काउंसलिंग के दौरान कई बार उसके परिवार के बारे में जानकारी कर उसे घर भेजने के लिए प्रयास किया गया लेकिन वह तैयार नहीं हुई है।
हालांकि, नारी निकेतन में किशोरी की काउंसलिंग जारी है। जिससे की वह जल्द ही अपने परिवार के साथ जा सके।
परिजनों और बच्चों के बीच प्यार की कमी है दूरी की वजह
‘नारी निकेतन की अधीक्षिका मधुलिका विष्ट ने बताया कि काउंसलिंग के दौरान पता चला कि कई बच्चों और उनके परिजनों के बीच प्यार की कमी है। इस वजह से वह परिवार को छोड़कर अलग हो जाते हैं। बच्चों द्वारा घर छोड़ना एक बड़ा खतरनाक कदम है, परिजनों को इस ओर ध्यान देना चाहिए और बच्चों से लगाव रखना चाहिए।
उड़ीसा से आई एक किशोरी को उसके परिजन गुस्से की वजह से लेने नहीं आ रहे, वह फोन करने पर अब कॉल रिसीव नहीं कर रहे हैं।’