सरकारी नौकरी पाने के लिए एक तरफ जहां दिन रात की मेहनत कर अभ्यर्थी तैयारी करते हैं तो दूसरी तरफ फर्जीवाड़ा कर सरकारी नौकरी दिलाने की कोशिशें भी हो रही हैं। इसी तरह की कोशिश दो लेखपाल, एक सिपाही और एक सहायक अध्यापक ने की, जिसके कारण अब उनकी ही नौकरी खतरे में पड़ गई है।
मझोला पुलिस ने रविवार को सहायक अध्यापक भर्ती परीक्षा में जिस रश्मि को पकड़ा है। उसका पति आरपीएफ में सिपाही है। आरोप है कि सिपाही पति ही परीक्षा के वक्त अपनी पत्नी को मोबाइल के जरिए नकल करवा रहा था, फोन पर दोनों की बात होेेने की जानकारी कॉल डिटेल से पुलिस को मिली है। ऐसे में आरपीएफ सिपाही की गिरफ्तारी भी जांच के बाद पुलिस कर सकती है तो उसकी नौकरी भी खतरे में पड़ जाएगी। वहीं दूसरी तरफ जिस देवेंद्र को नागफनी पुलिस ने रविवार को एक लेखपाल की जगह परीक्षा देते पकड़ा है। उसने खुलासा किया कि लेखपाल की जगह उसे परीक्षा देने के लिए राजी संभल के दो लेखपालों ने किया था। इनमें से एक लेखपाल को पुलिस गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि दो अन्य लेखपाल अभी वांछित हैं। इसके अलावा मझोला पुलिस ने भी एक सहायक अध्यापक को दूसरे परीक्षार्थी की जगह नौकरी देते पकड़ा है। आरोपी को जेल भेज दिया गया है, ऐसे में उसकी नौकरी भी खतरे में पड़ गई है। अभी इस मामले में चार अन्य आरोपी भी पुलिस के रडार पर हैं, जिनमें सॉल्वर गिरोह का मास्टरमाइंड अमरोहा निवासी पुलिसकर्मी का बेटा भी शामिल है।
ढाई घंटे का रिस्क लेकर लाखों कमाने के चक्कर में फंसे
मुरादाबाद। सॉल्वर गिरोह के सदस्य सहायक अध्यापक और बीए केे छात्र ने पुलिस को पूछताछ के दौरान बताया कि वह अपनी नौकरी भी दांव पर लगाने के लिए इस वजह से राजी हो गए, क्योंकि इसमें सिर्फ ढाई घंटे का रिस्क था। अगर वह परीक्षा देते वक्त न पकडे़ जाते तो उनको पकड़ पाना पुलिस के लिए मुश्किल था। इस ढाई घंटे के रिस्क के बदले में उनको ढाई से पांच लाख रुपये तक दिए जाते थे।