अगले महीने दिवाली पर एक सप्ताह तक जहरीली हवा में रहने के लिए तैयार रहिए। क्योंकि उन दिनों महानगर की हवा सांस लेने लायक नहीं रहती है। इसमें धुएं के कण और हानिकारक गैसों का मानक बेहद खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है। ऐसी हवा में सांस लेने से लोगों को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। सांस की नली और फेफड़ों में सूजन के साथ ही दिल का दौरा और कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का हवा की गुणवत्ता मांपने का स्वचालित यंत्र शहर में लगा हुआ है। वह सीधे दिल्ली कंट्रोल रूम को रिपोर्ट भेजता है। उसके साथ ही शहर में कई जगह अधिकारी मैनुअल तरीके से हवा की जांच करते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने हवा के दिवाली वाले दिन के 24 घंटे के औसत मानक जारी किए हैं। जो कि बेहद डराने वाले हैं। हवा की इतनी खराब स्थिति की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। ऐसी हवा में सांस लेना जानलेवा हो सकता है।
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दिवाली के दिन हवा का 24 घंटे का औसत मानक -
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वर्ष - एसपीएम आरएसपीएम एसओ-2 एनओ-2
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2015 546 310 53 40
2016 591 285 43.5 31
2017 550 294 28 52
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एक्यूआई का मानक -
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0 से 50 तक अच्छा
51 से 100 संतोषजनक
101 से 150 सामान्य प्रदूषण - खांसी व सांस रोग की समस्याएं
151 से 200 सघन प्रदूषण - फेफड़ों के साथ ही दिल की बीमारियां
201 से 300 खतरनाक स्तर - सांस लेने में परेशानी
301 से 400 जानलेवा स्तर - स्वसन व तंत्रिका तंत्र संबंधी गंभीर रोग
400 से ज्यादा शरीर के विभिन्न भागों में कैंसर जैसे गंभीर रोगों का खतरा ।
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दिवाली के आठ साल के आंकड़े डराने वाले हैं। ऐसी हवा सांस लेने लायक नहीं होती है। घरों से बाहर निकलते समय सावधानी बरते। मुंह पर कपड़ा लपेटकर ही बाहर निकले।
- अतुल कुमार, प्रभारी डाटा कलेक्शन सेंटर।
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हवा की ऐसी स्थिति की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इससे सांस, कैंसर, अस्थमा, ब्लड प्रेशर और दिल का दौरा जैसे गंभीर रोग हो सकते हैं। इसका प्रभाव दो सप्ताह तक लोगों को बीमार बनाता रहेगा।
- डा. राजेंद्र सिंह, वरिष्ठ चिकित्साधिकारी।
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