एक से 30 नवंबर तक यातायात माह महज दोपहिया वाहनों के चालान काटने में ही बीत गया। शहर में जगह-जगह चेकिंग के लिए तैनात रही यातायात पुलिस को एक भी अधिकारी और नेताजी ऐसे नहीं मिले, जिन्होंने यातायात के नियमों का उल्लंघन किया हो। ज्यादातर चालान युवाओं के काटे गए। जबकि पुलिस वालों ने ही जमकर यातायात नियमों का उल्लंघन किया। ज्यादातर पुलिस कर्मी बिना हेलमेट और कान पर मोबाइल लगाकर बाइक दौड़ाते नजर आए।
पुलिस, प्रशासिनक एवं अन्य सरकारी चौपहिया वाहनों के चालक बिना सीट बेल्ट के वाहन चलाते रहे। उन्हें चेकिंग के दौरान पुलिस अधिकारियों ने महज चेतावनी देकर छोड़ दिया। उनके न तो चालान किए और न ही जुर्माना लगाया। आंकड़ों की बात करें तो यातायात पुलिस और सिविल पुलिस इस बार शहर के हर चौराहे पर चेकिंग करती रही। चेकिंग के दौरान पुलिस का अभियान दोपहिया से आगे नहीं बढ़ पाया। चौपहिया वाहनों की चेकिंग तो केवल नाम मात्र ही हो पाई।
कारों से काली फिल्म नहीं उतारी गईं। दुपहिया वाहनों की चेकिंग में पूरा माह बीत गया। पूरे माह में न तो अधिकारियों के वाहनों के चालान हुए और न ही किसी नेताजी की गाड़ी पकड़ी गई। एक माह के दौरान पंद्रह हजार से ज्यादा वाहनों का चालान किया गया है। इस दौरान नेताओं की गाड़ी चेकिंग टीम के सामने से हूटर बजाती गुजरती रहीं। अधिकारियों के चालक भी बिना सीट बेल्ट के कारों को ड्राइव करते रहे। लेकिन किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।