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जिद्दी प्रेमिका, बेखौफ आशिक और दोनों का खौफनाक अंत

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मुरादाबाद।
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वेलेंटाइन सप्ताह में सोमवार के दिन प्रोमिस डे था। एक वादा बरेली के फाजिल ने मुरादाबाद की राबिया से किया था। वो था एक दूसरे का जीवन भर साथ निभाने का। यही वजह थी कि जब इन दोनों की प्रेम कहानी से पर्दा उठा तो राबिया के परिवार वालाें ने फाजिल का कत्ल कर दिया। उनको सजा दिलाने की जिद पर अड़ी राबिया को भी अपनी जान देनी पड़ गई। लेकिन ये प्रेम कहानी लोगों के जेहन में अभी भी जिंदा है।
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बरेली के रहने वाले फाजिल को प्यार था मुरादाबाद की रहने वाली राबिया से। राबिया के मामा का घर बरेली में था, जिस वजह से दोनों का वर्षोें से प्रेम संबंध था। राबिया की शादी उसके परिवार वाले मुरादाबाद के ही रहने वाले एक लड़के से कर देते हैं। परिवार का दबाव और समाज की उलाहना न सहना पडे़, इस वजह से राबिया भी न चाहते हुए शादी करने को मजबूर हो जाती है। लेकिन बचपन की मोहब्बत है, भुलाए नहीं भुलाई जा सकती है। हुआ भी यही सऊदी अरब में कमाने वाला पति राबिया को पसंद नहीं आया। दंपती के एक संतान हो गई लेकिन राबिया के दिल में अभी भी फाजिल ही बसा हुआ था। फाजिल भी राबिया के प्यार में सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार बैठा था। दोनों का मिलना जुलना दोबारा शुरू हो गया और फिर इसकी जानकारी उसके पति को भी हो गई। लिहाजा राबिया अपने मायके आकर रहने लगी और बहाने से फाजिल से मिलने भी चली जाया करती थी, एक दिन फाजिल ने खुलकर राबिया के पति से कह दिया कि पत्नी को तलाक दे दो, वो मेरे साथ खुश है। मैं उसके साथ खुश हूं। अपने रिश्ते के टूटने का खतरा भांपकर इसकी जानकारी राबिया के पति ने अपने ससुराल वालों को दे दी। यह बात पहले से ही राबिया के परिवार वालों को पता थी लेकिन उन्होंने बात दामाद को पता चली तो आपा खो दिया, रच दी एक खौफनाक साजिश। उनमें से एक ने फाजिल को फोन कर कहा कि आ जाओ, तुम्हारे रिश्ते को परिवार वालों ने मंजूरी दे दी है। तुम्हारी शादी राबिया से करवा देंगे क्योंकि अब उसका पति ही उससे दूरी चाहता है। लेकिन दिक्कत है कि राबिया के पति नहीं मान रहे हैं तो उनको मनाने के लिए एक ताबीज बनवा देंगे, जो कि पाकबड़ा के उमरी सब्जीपुर में एक दरगाह से मिलेगा। तुम्हें वह ताबीज लेने के लिए चलना पडे़गा। बैखौफ प्रेेमी पहुंच गया फोन करने वालों के पास। ये लोग थे, राबिया का भाई और रिश्ते का भाई। दोनों उसको लेकर पाकबड़ा पहुंचे और वहां पर रात के सन्नाटे में फाजिल पर अचानक हमला बोल दिया। आखिरी सांस तक वह दोनों से लड़ा, उस पर चाकू से वार किए गए लेकिन वह राबिया को छोड़ने के लिए तैयार न हुआ। इसका अंजाम ये हुआ कि फाजिल को अपनी जान से हाथ धोना पड़ गया। इस मौत की खबर कातिल ने फोन कर अपने पिता को दी, जिसे वहां पर मौजूद राबिया ने भी सुन लिया और फिर वह खड़ी हो गई, अपने प्रेमी का बदला लेने केलिए। कातिलों के गले में फांसी का फंदा डलवाने केलिए। इंतजार था तो बस सुबह होने का, इस दौरान दोनों कातिल घर पहुंचते हैं। वह उनसे कहती है कि तुमने मेरे फाजिल को मार डाला, ये ठीक नहीं, अब मैं तुम्हें भी नहीं छोडूंगी। भाई कहता है कि गलती हो गई, मुझे माफ कर दे। जिद्दी राबिया को देख भाई और परिवार वालों को खुद के फंसने का डर सताने लगा तो उन्होंने गला और मुंह दबाकर उसकी भी हत्या कर डाली। इसके बाद बीमारी से मौत का बहाना बनाकर उसका शव दफना दिया। पुलिस ने फाजिल हत्याकांड का पर्दाफाश किया तो राबिया की हत्या की जानकारी हुई। इसके बाद हत्यारोपियों को गिरफ्तार किया गया। कब्रिस्तान से राबिया का शव बाहर निकालकर पोस्टमार्टम कराया गया, जिसमें हत्या की पुष्टि हुई।
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