मुरादाबाद। जेल भूमि घोटाले में एसडीएम सदर रहे एक डिप्टी कलक्टर पर गाज गिर सकती है। भूमि घोटाले की जांच में डिप्टी कलक्टर की भूमिका उजागर हुई है। भूमि विनिमय में उपजिलाधिकारी द्वारा नियमों की अनदेखी करने की बात जांच में सामने आई है। तैयारी शासन को रिपोर्ट भेजने की है। इस घोटाले की जांच विजिलेंस भी कर रही है।
जेल भूमि घोटाले और सीलिंग की जमीन के बंदरबांट के आरोप में शासन ने विजिलेंस से प्राथमिक जांच कराई थी। गोपनीय जांच में आरोपों की प्रारंभिक पुष्टि होने के बाद शासन ने प्रकरण पर विस्तृत जांच बैठाई है। जांच में उजागर हुआ है कि सिरसखेड़ा में जेल की जमीन खरीदने के मामले में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। जिस जमीन का अधिग्रहण होना था उसे कुछ दिन पहले बेचा और खरीदा गया। कम दाम पर जमीन खरीदी गईं इसके बाद वहां अधिग्रहण हुआ।
मामूली दर पर खरीदी गई जमीनों का नियमानुसार सर्किल रेट से चार गुना मुआवजा मिला। भूमि विनिमय में भी नियमों की अनदेखी की गई। ऐसे ही कुछ आदेशों में तत्कालीन एसडीएम पर नियमों की अनदेखी करने के आरोप लग रहे हैं। जांच में ऐसे आदेशों को चिन्हित करके रिपोर्ट शासन को भेजने की कवायद चल रही है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में डिप्टी कलक्टर पर जल्द कार्रवाई हो सकती है। 63 हजार वर्ग मीटर के सीलिंग भूमि घोटाले में दो बाबुओं पर कार्रवाई हो चुकी है। लेकिन इसमें फंसे बड़े अधिकारियों के खिलाफ अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है।