मुरादाबाद। प्रधानमंत्री आवास योजना के सैकड़ों आवेदन सड़क पर पड़े मिलने के मामले में अब जिम्मेदार अफसरों ने खेल शुरू कर दिया है। पीड़ितों को योजना का लाभ दिलाने और आरोपियों को तलाशने की बजाय इस मामले को दलाल और दूसरे विभागों के पाले में फेंका जा रहा है। डूडा ने रविवार को इस खेल का जिम्मेदार आवास विकास और एमडीए को बता दिया। जबकि शनिवार को आवेदन फार्म फेंकने का जिम्मेदार नगर निगम को ठहराया गया था।
शासन की प्राथमिकता वाली पीएम आवास योजना के सैकड़ों आवेदकों के फार्म सड़क पर मिलने को अधिकारी सुलझाने की बजाय दबाने में लगे हैं। रविवार को 24 घंटे बीतने के बावजूद जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकी है। डूडा के जिम्मेदार अफसरों का कहना है कि उनकी न तो गलती है और न ही लापरवाही। ऐसे में परेशान आवेदकों के सामने समस्या यह है कि न्याय तो दूर, कोई भी विभाग इसे अपने क्षेत्र का मामला मानने को तैयार नहीं है। अफसरों के टालमटोल रवैया का फायदा दलाली कर गरीबों को लूटने वालों को मिलेगा।
पीओ डूडा दीपक कुमार ने बताया कि हमको 195 आवेदन पुलिस से प्राप्त हुए हैं। ये सभी एएचपी (अफोर्डेबल हाउसिंग पार्टनरशिप) के हैं। ये मकान ऐसे लोगों को बनाकर दिए जाते हैं, जिनके पास अपनी जमीन नहीं होती है। इनका निर्माण आवास विकास और एमडीए कराते हैं। उनके आवेदन बैंक से मिलते हैं और आवास विकास - एमडीए में जमा होते हैं। इनकी पूरी जिम्मेदारी भी उन्ही की है, डूडा का इससे लेना-देना नहीं है। ये आवेदन पीएम आवास योजना के निर्धारित प्रारूप पर भी नहीं हैं।
आनलाइन के आवेदन भी मिले -
कूड़े के ढेर से पीएम आवास योजना के ऑनलाइन जमा किए गए आवेदन और उनकी रसीद भी मिली हें। अफसर उनको दबाने का प्रयास कर रहे हैं। दीपक कुमार का कहना है कि ऑनलाइन आवेदन और रसीद फेंकने से कुछ नहीं होता है। वह हमारे पास कंप्यूटर में सुरक्षित हैं। कुल 15 हजार आवेदन प्राप्त हुए हैं। मैनुअल फार्म अधूरे होने के चलते जमा नहीं हुए होंगे और दीपावली की सफाई में किसी ने फेंक दिए होंगे। अफसर अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए ऐसे तर्क दे रहे हैं, जिनका लाभ आरोपियों और योजना के दलालों को मिलता दिखाई दे रहा है।