आहूजा ग्रुप के एमडी मनोज कुमार आहूजा की हत्या की साजिश रचने के आरोप में पुलिस ने तीन आरोपियों को बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किया है। इनमें एक वन विभाग का सेवानिवृत्त दरोगा, दूसरा आरोपी नगर निगम में ठेकेदार और तीसरा आरोपी डिश केबल का पूर्व कारोबारी है। तीनों का चालान कर उनको न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया है।
एसएसपी जे रविंदर गौड ने बताया कि मनोज कुमार आहूजा पीएमएस पब्लिक स्कूल में ट्रस्टी हैं और पीएमएस स्कूल का संचालन करते हैं। विद्यालय के पूर्व ट्रस्टी हरिओम अग्रवाल से मनोज का विवाद चल रहा है। वह चाहते थे कि दोबारा स्कूल के ट्रस्टी बनें और संचालन अपने हाथों में ले। इसके लिए उन्होंने वन विभाग के पूर्व दरोगा उमेश भट्ट निवासी लोहागढ़, शरद रस्तोगी उर्फ मामू (पूर्व में केबल कारोबारी) निवासी गोविंद नगर और केशव शर्मा उर्फ राहुल ठेकेदार) से संपर्क किया था। इन तीनों ने पहले कोशिश की कि ट्रस्ट एवं बोर्ड के निदेशक शशिकांत से संपर्क कर हरिओम को दोबारा ट्रस्टी बोर्ड का सदस्य बनवाएं लेकिन इसमें सफल न हो पाने पर हरिओम ने एक करोड़ रुपये में मनोज कुमार आहूजा की हत्या की साजिश रच दी। 15 लाख रुपये एडवांस भी दे दिए गए थे। इसकी जानकारी मनोज कुमार आहूजा को शकील अहमद चौधरी निवासी इकबाल बिल्डिंग थाना नागफनी, अनूप दूबे निवासी डिप्टीगंज ने मनोज कुमार आहूजा को दी तो मामले का खुलासा हो सका। एसएसपी से मनोज ने शिकायत की तो रिपोर्ट दर्ज कर आरोपियों को बुधवार देर रात ही गिरफ्तार कर लिया गया ।
एसएचओ सिविल लाइन शक्ति सिंह का कहना है कि हरिओम के खिलाफ पुख्ता साक्ष्य नहीं है, इस वजह से उनको गिरफ्तार नहीं किया गया है। सूत्रों की मानें तो पुलिस के हाथ एक कॉल रिकार्डिंग लगी है, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई लेकिन एसएचओ ने इससे इंकार किया है। हत्या की साजिश को उन्होेंने पांच महीने पहले रचे जाना बताया है लेकिन यह रकम कब कब दी गई ये भी स्पष्ट नहीं किया जा सका है। एसएचओ का कहना है विवेचना के दौरान कई सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे। खुद एसएसपी जे रविंदर गौड ने इस मामले में सिविल लाइन पुलिस के साथ ही गलशहीद एसओ दिनेश शर्मा को भी लगाया था, एक सप्ताह तक इस मामले की जांच पड़ताल की गई।