यूपी पुलिस में सीसीटीएनएस के जरिए अब दरोगाओं को हाथ से लिखने के बजाय कंप्यूटर पर हिंदी टाइपिंग कर केस डायरी काटनी होती है। यह व्यवस्था नए दरोगाओं के लिए तो ठीक है लेकिन रिटायरमेंट के करीब पहुंच चुके दरोगाओं को कंप्यूटर पर टाइपिंग कर केस डायरी काटने में दिक्कत हो रही है।
ऐसे में केस डायरी के पर्च काटने के लिए अब दरोगाओं ने टाइपिंग के लिए नए तरीके ढूंढने शुरू कर दिए हैं। इनमें सबसे ज्यादा मददगार उनके लिए एंड्रायड मोबाइल साबित हो रहे हैं। एंड्रायड मोबाइल में गूगल वॉइस टाइपिंग की मदद से दरोगाजी केस डायरी लिख रहे हैं। इसमें भी गलतियां हो रही हैं, उसे सुधारने के लिए वह थानों में तैनात कंप्यूटर आपरेटर की मदद ले रहे हैं। कंप्यूटर आपरेटर उन गलतियाें को सुधारते हैं, जिसके बाद केस डायरी के पर्चे सीसीटीएनएस पर अपलोड किए जा रहे हैं। कई दरोगा ऐसे भी हैं, जो केस डायरी के पर्चे काटने के लिए प्राइवेट कंप्यूटर आपरेटर की मदद ले रहे हैं। इसके बदले में उनको सुविधा शुल्क भी दे रहे हैं। एक दरोगाजी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह एंड्रायड मोबाइल का इस्तेमाल कर पाते हैं। व्हाटसएप और फेसबुक पर अपनों की तस्वीरें देख लेते हैं, वीडियो कॉलिंग परिवार के लोग करते हैं तो उनसे बात कर लेते हैं। बड़ी मुश्किल से इतना कुछ तो वह अभी सीख पाए हैं। जब वह पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे तब न तो एंड्रायड मोबाइल था न ही उनको कंप्यूटर के बारे में ज्यादा जानकारी थी। ऐसे में अब नए नियम के तहत कंप्यूटर पर केस डायरी के पर्चे काटना तो उनके लिए मुमकिन नहीं है। प्राइवेट कंप्यूटर आपरेटर की मदद से वह केस डायरी के पर्चे कटवाते हैं। हाल ही में सिविल लाइन थाने में 16 प्रशिक्षु आईपीएस पहुंचे। वहां पर एडीजी सुनील कुमार गुप्ता और एसएसपी जे रविन्दर गौड के सामने ही दरोगाओं की परेशानी का खुलासा हुआ है।