मूंडापांडे के करनपुर में डा. रफत नर्सिंग होम से लिए गए दवाओं के सैंपल में से एक की रिपोर्ट में दवाई नकली पाई गई है। इस दवा बनाने वाली बंगलुरू की कंपनी भी जांच में फर्जी निकली है। लखनऊ औषधि आयुक्त एके जैन के निर्देश पर की गई इस छापामारी में बिना लाइसेंस के नर्सिंग होम और मेडिकल स्टोर संचालित होते मिले। चिकित्सक की एमबीबीएस की डिग्री भी फर्जी मिलीं थीं। अभी नर्सिंग होम के मेडिकल स्टोर से मिली सरकारी अस्पताल की दवाओं के सैंपल की रिपोर्ट आनी है।
ड्रग इंस्पेक्टर मुरादाबाद नरेश मोहन दीपक, अमरोहा के राजेश कुमार और अनुरोध कुमार तथा बिजनौर के आशुतोष मिश्रा की टीम ने 20 जून को रफत नर्सिंग होम में छापा मारा था। इस दौरान नर्सिंग होम में 10 मरीजों को ड्रिप लगी हुई मिली थीं। ड्रग इंस्पेक्टर नरेश मोहन दीपक के अनुसार डा. रफत की एमबीबीएस की डिग्री, ताज नर्सिग होम के नाम स मेडिकल स्टोर फर्जी मिला है। इसकी पुष्टि करनपुर में चल रहे मेडिकल स्टोर के मालिक मो. ताज ने दी। उनका कहना है कि डा. रफत के मेडिकल स्टोर से कोई लेना देना नही है। छापे के दौरान स्टोर में सरकारी सप्लाई नॉट फार सेल तथा अन्य प्रतिबंधित दवाएं भी मिली थीं। आरोपी डा. रफत के खिलाफ फर्जीवाड़ा करने की धारा 419, 420, 332, ड्रग एक्ट की धारा 15(2) / 15(3) के तहत ट्रामाडोल इंजेक्शन में गड़बड़ी। ड्रग एक्ट की धारा 22 के 1055 (अ), सरकारी सप्लाई की दवाइयां बेचने के संज्ञेय अपराध, जीवन से खिलवाड़ करने की धारा आईपीसी 275, मेडिकल एक्ट की धारा 18/27 और साजिश रचने की धारा 120 बी के तहत अभियोग दर्ज किया गया था।
बुधवार को रफत नर्सिंग होम से ली गईं दवा एक्ससिम की जांच रिपोर्ट मिल गई है। ड्रग इंस्पेक्टर ने बताया कि रिपोर्ट के अनुसार इस एंटीबायोटिक्स दवा में सिफेक्सिम और ऑफलाक्सासिन दोनों साल्ट शून्य पाए गए हैं। पैकिंग में यह दवा बंगलुरू की रिमेक हेल्थकेयर कंपनी की बताई गई । जिसकी बंगलुरू में जांच कराने पर पता चला है कि इस नाम की कोई कंपनी ही नहीं है। अभी सरकारी अस्पताल की सप्लाई वाली दवाओं की रिपोर्ट आनी बाकी है।
मैंने दवाई मुरादाबाद से खरीदी थीं। उनका बिल भी लिया था। दवा के नकली होने की जानकारी नहीं है। मैंने मेरठ के मेडिकल कालेज से एमबीबीएस की डिग्री ही नहीं बताई ।
- डा. रफत आरोपी।