पिछले शिविरों में जिला मुख्यालय से नसबंदी ऑपरेशन के लिए टीम आती थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। सीएचसी पर तैनात महिला चिकित्सक को शिविर में पंजीकृत 11 महिलाओं की नसबंदी के लिए लगाया गया। चिकित्सक ने करीब एक बजे से ऑपरेशन शुरू किए। पहली दो महिलाओं के ही केस में निर्धारित समय से अधिक लग गया और वह नसबंदी नहीं कर पाईं। इस बीच दोनों महिलाओं की हालत बिगड़ गई। महिलाओं के साथ आई आशाओं के भी हाथ पांव फूल गए, उन्होंने इसे लेकर नाराजगी भी जताई। दोनों महिलाओं को जिला अस्पताल रेफर किया गया। शिविर रुकने से अन्य महिलाएं भी अपने घर लौट गईं। जिला अस्पताल में दोनों महिलाओं की हालत में सुधार है।
ट्रेनिंग के बावजूद डॉक्टर नहीं कर पाईं ऑपरेशन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कांठ में जिन महिला चिकित्सक द्वारा नसबंदी के दौरान महिलाओं की हालत बिगड़ी है, वह चिकित्सक मेरठ से ट्रेनिंग लेकर आई हैं। सीएचसी चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राघो कुमार सिंह ने बताया कि पिछले दो बार से नसबंदी कैंप जिले से आने वाली टीम के न आने के कारण आयोजित नहीं हो पाए थे। सीएचसी पर तैनात महिला चिकित्सक को ट्रेनिंग के बाद नसबंदी ऑपरेशन करने का प्रमाणपत्र मिला है। इसके कारण सोमवार को उन्होंने खुद ही ऑपरेशन करने के लिए कहा था। यदि वह कहतीं कि ऑपरेशन नहीं कर पाएंगी, तो जिला मुख्यालय से टीम बुलाई जाती। केस बिगड़ने के बाद महिला डॉक्टर किसी से बिना कुछ बताए चुपचाप अस्पताल से चलीं गई।
-कांठ सीएचसी में नसबंदी ऑपरेशन में अधिक समय लग गया। नशे का असर खत्म होने पर महिलाओं को परेशानी हुई थी। जिला अस्पताल में दोनों की हालत में काफी सुधार है। बुधवार को उनकी छुट्टी कर दी जाएगी। महिला डॉक्टर को भी सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
- डॉ. एमसी गर्ग, सीएमओ