मुरादाबाद। ईसाई समुदाय के श्रद्धालु पर्व ईस्टर के पूर्व 40 दिनों को दुख-भोग के दिनों के रूप में मनाएंगे। इस चालीसा काल की शुरुआत 22 फरवरी को राख बुधवार के साथ हुई। बुधवार को चर्च में विशेष प्रार्थनाएं की गईं। पादरी द्वारा खजूर की डालियां जलाकर बनाई गई राख से श्रद्धालुओं के माथे पर क्रूस का निशान बनाया गया। अगले चालीस दिन तक ईसाई समाज के लोग प्रार्थना, परहेज में बिताएंगे और उपवास करेंगे।
साथ ही सेवा कार्य भी किए जाएंगे और प्रभु यीशु के बलिदान को याद किया जाएगा। ईसाई समाज के लिए यह चालीसा काल काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान प्रभु यीशु के क्रूस पर दिए बलिदान के पवित्र दिनों के रूप में इसे याद किया जाता है।
इस बार इन चालीसा काल के दौरान तुर्की में आए भूकंप पीड़ितों के पुनर्वास, रूस-यूक्रेन में युद्ध विराम और शांतिवार्ता, पर्यावरण सुरक्षा, शांति, सद्भाव और समरसता के लिए विशेष प्रार्थना की जाएगी। चालीसा काल गुड फ्राइडे तक चलता है। इस बार गुड फ्राइडे सात अप्रैल को मनाया जाएगा। नौ अप्रैल को ईस्टर पर्व मनाया जाएगा। इस दौरान पादरी ब्रजेश मैंसल, पादरी अनिल सी लाल, पादरी रोहित मैसी, पादरी अर्नेस्ट मार्क, रवि जॉन आदि मौजूद रहे।