यह सही तरीका है और जितना तापमान डिजिटल थर्मामीटर में प्रदर्शित हो, उससे एक डिग्री कम मानकर उपचार शुरु करना चाहिए। यह बात बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील खट्टर ने कही। वह एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की ओर से आयोजित सीएमई में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे। यह आयोजन रविवार को कांठ रोड स्थित एक होटल में हुआ। मुरादाबाद के अलावा मेरठ व नोएडा के बाल रोग विशेषज्ञों ने भी शिरकत की। मेरठ से आए डॉ. अजय जैन ने कहा कि यदि बच्चे को बुखार के साथ पहले दिन से लाल चकत्ते पड़ते हैं तो यह चिकन पॉक्स हो सकता है। बुखार के दूसरे दिन चकत्ते पड़ते हैं तो इसे स्कार्लेट फीवर कहते हैं। चौथे दिन हो तो मीजेल्स व पांचवें दिन रुबैला कहलाता है।
नोएडा के डॉ. राजीव थापर ने जापानी इंसेफेलाइटिस पर रिपोर्ट प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि यह पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नहीं होता लेकिन बिहार व पूर्व के राज्यों के जो प्रवासी आते हैं। उनके कारण बच्चों में फैल सकता है। डॉ. राजीव ने इसकी वैक्सीन पर चर्चा की। नोएडा के डॉक्टर अरविंद गर्ग ने कहा कि बच्चों में कभी कभी बुखार के कारण का पता नहीं चलता। ऐसे में डॉक्टर एंटीबायोटिक दवा दे देते हैं। लगातार एंटीबायोटिक के सेवन से बच्चे की हालत और खराब हो सकता है। इनके अलावा डॉ. पायल पुरी व एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के अध्यक्ष डॉ. केजी गुप्ता ने रिपोर्ट प्रस्तुत की। इस मौके पर आईएमए के अध्यक्ष डॉ. रवि गंगल, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. बीके दत्त, डॉ. शलभ अग्रवाल, डॉ. जेपी टंडन, डॉ. अर्जुन टंडन, डॉ. अनिल महेश, डॉ. नीतू खन्ना, डॉ. प्रशांत पांडे, डॉ. मनीश कपूर आदि मौजूद रहे।
बुखार में बढ़ जाए लीवर व तिल्ली तो स्क्रबटाइफस का खतरा
बच्चों में बुखार के कारण यदि यदि लीवर व तिल्ली बढ़ जाए तो यह सामान्य बात नहीं है। यह जानवरों से फैलने वाली बीमारी स्क्रबटाइफस के कारण होता है। इसमें बच्चे के अंदर खून की कमी हो जाती है। पीलिया आदि रोग लग जाते हैं। ऐसे में डॉक्टर से परामर्श लेकर जांच जरूर करानी चाहिए।
- डॉ. केजी गुप्ता, अध्यक्ष, एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स
तीन माह से कम उम्र के बच्चों में बुखार सामान्य नहीं
तीन माह से कम उम्र के बच्चों को यदि बुखार है तो यह सामान्य नहीं है। इसे सेप्टीसीमिया मानकर उपचार शुरू किया जाता है। मेन इनजाइटिस भी हो सकता है, इसलिए रीढ़ की हड्डी के पानी का सैंपल लेकर जांच कराई जाती है। गर्मी के दिनों में छोटे बच्चों को ढककर न रखें। कमरे में कूलर आदि चलाएं, जिससे नमी बनी रहे।
- डॉ. पायल पुरी, बाल रोग विशेषज्ञ