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मंत्रोच्चारण का मानव जीवन पर पड़ता है गहरा प्रभाव : डॉ. चिन्मय

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मुरादाबाद।
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अध्यात्म ज्ञान एवं चिंतन संस्था की ओर से मासिक ब्रह्मज्ञान विचार गोष्ठी का आयोजन एमआईटी सभागार में किया गया। इसका विषय मंत्र का मानव पर प्रभाव था। इस विषय पर शांतिकुंज हरिद्वार के डाॅ. चिन्मय पंड्या ने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि मंत्रोच्चारण का मानव जीवन पर अत्यंत प्रभाव पड़ता है।
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मंत्रों के उच्चारण से जो ध्वनि निकलती हे, उसका प्रभाव मानव के मन, मस्तिष्क व शरीर सभी पर पड़ता है। मंत्रों के सही उच्चारण से व्यक्ति का मन शांति को प्राप्त करता है और मस्तिष्क विकसित होता है। शरीर के विभिन्न अंग संपुष्ट होते हैं। मंत्र पाठ के व्यक्ति के संस्कार भी शुद्ध होते हैं। मंत्रों के माध्यम से मानव का आध्यात्मिक उत्थान होता है। मंत्रों के माध्यम से विक्षिप्त व्यक्ति तथा अपराधी व्यक्ति भी शांति एवं सद्बुद्धि को प्राप्त कर सकता है। बहुत से व्यक्ति अज्ञानतावश मंत्रों का सही प्रकार उच्चारण नहीं करते हैं। ऐसी दशा में उनको पूर्ण लाभ नहीं मिल पाता है। फिर भी कुछ लाभ तो प्राप्त होता ही है। मंत्र पाठ के लिए यह आवश्यक है कि गुरु से इस बारे में शिक्षा ली जा सके। इस दौरान रविंद्रनाथ कत्याल, राजीव गुप्ता, देवेश भारद्वाज, कर्नल हर्ष वर्धन, सत्य प्रकाश गुप्ता, नीरज भूषण, शिव किशोर शर्मा, प्रभा शर्मा, अनिल सिक्का, शैल गोयल, अनिल सिंह, नीरज कुमार आदि मौजूद रहे।
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