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अमर उजाला की मुहिम का असर, संभल में मृत सोत नदी को पुनर्जीवित करने काम शुरू  

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, संभल Updated Sun, 16 Jun 2019 05:37 AM IST
जोया क्षेत्र में सोत नदी पर कब्जा कर बनाए गए मकान (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala

खास बातें

-जिलाधिकारी ने फावड़ा चलाकर की अभियान की शुरुआत
-अमर उजाला ने सोत की दुर्दशा पर खबरें प्रकाशित कीं तो प्रशासन ने कसी कमर
संभल के असमोली क्षेत्र के गांव मातीपुर में जिला प्रशासन ने नागरिकों का सहयोग लेकर सोत नदी को पुनर्जीवित करने की मुहिम का शनिवार को सुबह शुभारंभ कर दिया। शुभारंभ से पहले हवन पूजन के बाद नदी की खाली जमीन पर पौधे लगाए गए। साथ ही नदी की जमीन पर खुदाई कराई गई। इसके लिए खुद जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने फावड़ा चलाया। उनके साथ भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश सिंघल, पुलिस अधीक्षक यमुना प्रसाद ने भी नदी खुदाई के पावन काम में भागीदारी। राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र की कई हस्तियों ने शामिल रहीं।

आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों ने भी सहयोग दिया। अमरोहा जिले से संभल जिले में प्रवेश करने वाली सोत नदी गुम गई है। नदी की जमीन पर अवैध कब्जे हो गए। सूखी नदी की जमीन पर हो रहे अवैध कब्जों को किसी ने नहीं रोका। अमर उजाला ने- कहां गए जल स्रोत शीर्षक खबरों की श्रृंखला से इन हालातों को जनता के साथ जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार के सामने उठाया। प्रशासन ने इसे गंभीरता से लिया। खुद जिलाधिकारी अविनाश कृष्ण सिंह ने पूरे मामले को समझा और नदी को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया। उन्होंने बहजोई में जिलास्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक की। मनरेगा में नदी की खुदाई कराने और खाली जमीन पर पौधे लगाने की कार्ययोजना बनाई। 

खुदाई करके दोबारा जिंदा की जाएगी सोत
जिले में 45-45 किलोमीटर सोत नदी का हिस्सा है। इस पर लोगों ने कब्जा कर लिया। यह नदी कभी सदानीरा थी। अमर उजाला ने सोत की दुर्दशा के बारे में खबरें कीं तो जिला प्रशासन ने इसकी दशा सुधारने का फैसला किया। नदी की जमीन से अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं। अब नदी की खुदाई करके इसे पुनर्जीवित किया जाना है। इसके लिए शनिवार को नदी पूजन और हवन के साथ औपचारिक शुरुआत कर दी गई। इस मौके पर राजनीतिक नेताओं में नरेंद्र सिंह, हरेंद्र सिंह, विरलेश यादव, संजय सांख्यधर और अधिकारियों में मुख्य विकास अधिकारी उमेश कुमार त्यागी, अपर जिलाधिकारी लवकुश त्रिपाठी, संभल के एसडीएम दीपेंद्र यादव, चंदौसी के एसडीएम महेश दीक्षित, एआरटीओ छबि सिंह चौहान, डीएफओ डीके चतुर्वेदी ने भाग लिया। अधिकारियों ने जनता को पर्यावरण के खतरों के प्रति आगाह किया और भूजल स्रोतों को बचाने के लिए प्रेरित किया। अधिकारियों ने कहा कि यदि यही हाल रहा आने वाली पीढ़ी को गंभीर संकटों को सामना करना पड़ेगा। 
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नदी बहेगी, नदी के दोनों तरफ दिखेंगे छायादार वृक्ष 

सोत नदी पर बने मकान (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
वातावरण में बड़ी तेजी के साथ बदलाव हो रहा है। ग्लोबल वार्मिंग बढ़ रही है। जल स्रोत सूख रहे हैं। हमारे संभल जनपद में चालीस पचास वर्ष पहले सोत नदी बहा करती थी। लेकिन यह नदी धीरे-धीरे यह नदी मिट गई। नदी अब सिर्फ कागजों में रह गई। लेकिन हमारे अधिकारियों ने इस नदी को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया। जनता और जनप्रतिनिधियों से सहयोग लेकर नदी को पुनर्जीवित करने के काम की औपचारिक शुरूआत शनिवार को कर दी है। अब हर रोज कुछ न कुछ काम होगा  और आने वाले दिनों में नदी बहेगी। नदी दोनों तरफ खाली जमीन पर छायादार पौधे लगाए जाएंगे। जो पर्यावरण को सुधारेंगे और आम लोगों को छाया देंगे। वहीं भूल जलस्तर भी बढ़ेगा। 
अविनाश कृष्ण सिंह, जिलाधिकारी। संभल।    
  
नजर आएगी हरियाली ही हरियाली 
अमर उजाला ने कहां गए पर्यावरण पर आए संकट को शृंखलाबद्ध तरीके जनता के बीच रखा। कहां गए जल स्रोत शीर्षक से लगातार खबरें प्रकाशित की गईं। इसका संज्ञान जिला प्रशासन ने लिया। अब मनरेगा के तहत नदी की खुदाई होगी। वन विभाग खाली जमीन पर पौधे लगाएगा। अमर उजाला की पहल पर जिला प्रशासन ने अपना काम जारी रखा तो आने वाले वर्षों में जनपद संभल का नाम उन जनपदों में शामिल हो जाएगा जहां पर हरियाली ही हरियाली नजर आएगी। साथ ही सोत नदी भी पुनर्जीवित हो जाएगी।
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