बावनखेड़ी कांड की खलनायिका अपनी दास्तां किताब के जरिये बयां करेगी। उसने इसेकलमबंद करने की मंशा जेल अधिकारियों से जाहिर की। उसने उनसे डायरी और पेन की दरख्वास्त की, जिसे पूरा कर दिया गया है। उसने लिखना शुरू भी कर दिया है। जेल के सूत्रों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट से डेथ वारंट रद्द होने के बाद शबनम नार्मल हो गई है। वह पहले की तरह साथी महिला बंदियों से हंसने बोलने लगी है। अमरोहा के गांव बावनखेड़ी में करीब सात साल पहले प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने सात परिजनों का गला कुल्हाड़ी से काटने वाली शबनम अपने ऊपर किताब लिख रही है। इस किताब में वह बावनखेड़ी कांड से लेकर जेल में बिताए गए वक्त और बेटे ताज के जन्म से लेकर सलाखाें में उसकी परवरिश तक की दास्तान लिखेगी। पिछले कुछ दिनों से उसने डायरी लिखना शुरू किया है, शबनम की इच्छा है कि इस डायरी को किताब के रूप में छापा जाए। जेल प्रशासन का कहना है कि शबनम डेथ वारंट निरस्त होने के बाद से एकदम सामान्य है। हालांकि उसे अपने बेटे ताज की चिंता सता रही है। क्योंकि उसका बेटा दिसंबर में छह साल का हो चुका है और जेल मैनुअल के अनुसार अब बेटा उसके साथ जेल में नहीं रह सकता। शबनम ने पिछले दिनों बेटे की सुपुर्दगी की बाबत विचार करने के लिए जेल प्रशासन से एक माह की मोहलत मांगी थी, जिसमें से अब केवल 20 दिन बचे हैं।