इस मामले में सीए की पत्नी शालिनी तिवारी ने मझोला थाने में केस दर्ज कराया था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से 31 मार्च को पाकबड़ा के गिंदौड़ा निवासी केशव शरण शर्मा और कोतवाली के रेती स्ट्रीट मोहल्ला निवासी विकास शर्मा को गिरफ्तार कर सीए हत्याकांड का खुलासा किया था। पुलिस पूछताछ में केशव ने बताया था कि सीए श्वेताभ तिवारी ने अपने साले संदीप ओझा के नाम काफी प्रॉपर्टी खरीद रखी है। इस प्रॉपर्टी पर पूर्व ब्लॉक प्रमुख ललित कौशिक कब्जा करना चाहता था। इस मामले में श्वेताभ तिवारी रास्ते का रोड़ा बन गए थे।
जिन्हें रास्ते से हटाने के लिए दस लाख रुपये की सुपारी ललित कौशिक ने दी थी। आरोपियों की निशानदेही पर घटना में इस्तेमाल हथियार भी बरामद कर लिए गए थे। घटना में शामिल रहे ललित कौशिक और खुशवंत उर्फ भीम को पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है। मझोला थाना प्रभारी ने विकास के खिलाफ एनएसए में कार्रवाई के लिए रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों की संस्तुति के आधार पर जिला मजिस्ट्रेट को भेजी थी।
जिला मजिस्ट्रेट से अनुमति मिलने के बाद मझोला थाने में विकास शर्मा के खिलाफ एनएसए में कार्रवाई करते हुए रिपोर्ट अदालत में पेश की। उधर, विकास शर्मा ने अपने अधिवक्ता अभिषेक शर्मा के जरिए जमानत के लिए अदालत में अर्जी दाखिल की थी। जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता एवं सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता संजीव अग्रवाल ने बताया कि मंगलवार को आरोपी विकास शर्मा की जमानत अर्जी अदालत में पेश की गई। जिस पर बहस सुनने के बाद अदालत ने जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया है।