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कोर्ट में हाजिर हुए आजम खां और अब्दु्ल्ला आजम

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मुरादाबाद। छजलैट के 14 साल पुराने हाईवे जाम और बवाल मामले में रामपुर के सपा विधायक आजम खां और उनके बेटे विधायक अब्दुल्ला आजम बृहस्पतिवार दोपहर एमपी-एमएलए स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट स्मिता गोस्वामी की अदालत में पेश हुए। इस दौरान कचहरी परिसर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रही। इस केस में आरोपी पूर्व विधायक इकराम कुरैशी के कोर्ट में हाजिर नहीं होने के कारण आजम खां और अब्दुल्ला आजम समेत अन्य आरोपियों के भी बयान दर्ज नहीं हो पाए। अब इस मामले में 28 जुलाई हो सुनवाई होगी।
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छजलैट थाने के सामने 29 जनवरी 2008 को सपा विधायक एवं पूर्व मंत्री आजम खां की गाड़ी रोक कर पुलिस ने चेकिंग की थी। आरोप है कि चेकिंग के विरोध में आजम खां सड़क पर बैठ गए थे और हंगामा किया था। आस पड़ोस के जनपदों से भी सपा नेता उनके समर्थक में आ गए थे। इस मामले में आजम खां, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम समेत नौ लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया था। इस केस की सुनवाई एमएलए एमपी स्पेशल मजिस्ट्रेट कोर्ट स्मिता गोस्वामी की अदालत में चल रही है।
बृहस्पतिवार को इस मामले में कोर्ट में सुनवाई थी। आजम खां और अब्दुल्ला आजम के कोर्ट में पेश होने की सूचना पर कचहरी परिसर में सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। सीओ सिविल लाइंस आशुतोष तिवारी और सिविल लाइंस थाना प्रभारी गजेंद्र सिंह फोर्स के साथ कचहरी में मौजूद रहे। दोपहर एक बजकर चालीस मिनट पर आजम खां अपने बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ कोर्ट पहुंचे और हाजिर हुए। आजम खान, उनके बेटे अब्दुल्ला के अलावा राजेश यादव, राजकुमार प्रजापति, नूरपुर के सपा के पूर्व विधायक नईम ऊल हसन, पूर्व विधायक मनोज पारस, अमरोहा के सपा विधायक महबूब अली भी अपने बचाव में बयान देने के लिए हाजिर हुए। पूर्व विधायक इकराम कुरैशी के हाजिर नहीं होने के कारण अन्य आरोपियों के भी बयान दर्ज नहीं हो पाए। पूर्व विधायक इकराम कुरैशी की ओर से स्थगन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। इकराम कुरैशी के गैर हाजिर होने की वजह से बयान दर्ज नहीं हो सके। अदालत ने इकराम कुरैशी को हाजिर होने के लिए अंतिम अवसर प्रदान करते हुए आगामी तिथि 28 जुलाई लगा दी है।
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आजम खान के अधिवक्ता शाहनवाज सिब्तेन ने बताया कि पूर्व विधायक नईमऊल हसन की ओर गवाहों से जिरह करने के लिए प्रार्थनापत्र अदालत में प्रस्तुत किया गया है। जिस पर सुनवाई की गई है। ऐसी परिस्थितियों में बचाव पक्ष की ओर से बयान नहीं होने चाहिए।
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