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अदम से लाई है हस्ती में आरजू-ए-रसूल...

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दरगाह हजरत शाह बुलाकी साहब के प्रांगण में नजरे सरकार वारिस-ए-पाक का आयोजन किया गया। जिसमें कई अकीदतमंद शायरों ने अपने कलाम पेश किए और तकरीर की।
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सिविल लाइंस स्थित दरगाह पर आयोजित इस कार्यक्रम का शुभारंभ हाफिज मोहम्मद अली ने तिलावते कलाम-ए-पाक से किया। इस मौके पर नाते पाक पेश करते हुए जाकिर वारसी ने कहा- अदम से लाई है हस्ती में आरजू ए रसूल, कहां-कहां लिए फिरती है जुस्तजू-ए-रसूल। अमीन वारिस ने कहा-मेरी जिंदगी की किताब में कोई नाम है तो अली का है, मुझे जानता है यह कुल जहां यह गुलाम है तो अली का है। इसके अलावा हसन वारिस, शाहनवाज वारसी, शायर कशिश वारसी आदि ने कलाम पेश किए।
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कार्यक्रम को मुख्य वक्ता भागलपुर बिहार से तशरीफ़ लाए अध्यात्मिक धर्मगुरु हजरत सैय्यद यादगार शाह वारसी, धर्मगुरु चांद शाह वारसी, जलाल शाह वारसी, रामपुर से तुराब शाह वारसी, जिले से परवेज शाह वारसी, महबूब शाह वारसी, नूर शाह वारसी, रहमत शाह वारसी, शाहिद शाह वारसी, भूरे शाह वारसी आदि ने भी खिताब किया। इस अवसर पर उबैद वारसी, जाकिर वारसी, हैदर वारसी, अनस वारसी, अमीन वारिस, अल्तमश वारसी, आदिल वारसी, सादिक वारसी, समीर वारसी, निहाल वारसी, नदीम वारसी, हसन वारसी, अदनान वारसी, नसीम वारसी, रिजवान वारसी आदि मौजूद रहे।
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