ठाकुरद्वारा। नगर में रामलीला संपन्न होने के बाद शाम को कलाकारों ने भक्त प्रहलाद की सच्ची ईश्वर भक्ति नाटक का मंचन किया। उन्होंने संदेश दिया कि सच्चे भक्त की ईश्वर हमेशा सहायता करते हैं। पूजा अर्चना के बाद कलाकारों ने बताया कि राजा हिरण्याकश्यप का पुत्र प्रहलाद सच्चा ईश्वर भक्त थे। जबकि उनके पिता हिरण्याकश्यप स्वयं को भगवान बताते हुए लोगों से अपनी पूजा करने के लिए जोर देते थे लेकिन प्रहलाद उनकी बात नहीं मानता था और हमेशा भगवान विष्णु की भक्ति और पूजा पाठ में लगा रहता था। हिरण्या कश्यप ने उन्हें काफी समझाने बुझाने का प्रयास किया लेकिन जब प्रहलाद नहीं माने तो तो उनके पिता ने उन्हें मारने के लिए कई योजनाएं बनाई। उन्हें मुझे पहाड़ से नीचे फिंकवाया। हाथियों से कुचलवाने का प्रयास किया। अपनी बहन होलिका की गोदी में बैठकर आग के हवाले कर दिया लेकिन प्रहलाद का बाल बांका भी नहीं हुआ और होलिका आग में जलकर राख हो गई। फिर हिरण्या कश्यप ने प्रहलाद को आग के दहकते खंबे में बांध दिया। उसे बचाने के लिए भगवान विष्णु खंबा तोड़कर नरसिंह अवतार के रूप में प्रकट होते हैं। हिरण्या कश्यप को गोदी में उठाकर उसका वध कर देते हैं। यह दृश्य देखकर पंडाल में भगवान विष्णु और भक्त प्रह्लाद के जयकारे गूंजने लगते हैं। कार्यक्रम का संचालन प्रबंधक अवनीश कुमार शर्मा, अध्यक्ष दिनेश कुमार पूठिया ने किया।