मुरादाबाद। नगर निगम की संयुक्त आयुक्त निशा मिश्रा ने जिन आवंटियों के आवासों को निरस्त किया हैं, उनमें कुछ पांच दशक से भी अधिक पुराने हैं। नियम विरुद्ध होने के कारण ये सभी आवंटन निरस्त किए गए हैं।
नवाबपुरा चौकी के निकट नगर निगम के आवास संख्या एक को राम किशन के नाम पर 25 रुपये महीने किराये पर 1965 में आवंटित किया गया था। राम किशन की मौत होने के बाद 100 रुपये महीने किराए पर इस भवन को नसीम के नाम पर परिवर्तित कर दिया गया, लेकिन अब इस आवंटन को भी निरस्त कर दिया गया है।
इसके अलावा कंपनीबाग गांधी पार्क के निकट नगर निगम के भवन संख्या तीन हिंदू कॉलेज के एचओडी एलडी चतुर्वेदी के नाम पर 19 सितंबर 1970 को आवंटित किया गया था। कागज में आवंटन की अवधि दर्ज नहीं की गई। एलडी चतुर्वेदी की मौत के बाद उनकी पत्नी कुसुम चतुर्वेदी मकान में रह रही हैं। नगर निगम ने इस आवंटन को भी निरस्त कर दिया है।
बंगला गांव चौराहा स्थित नगर निगम के दो भवन में से एक तत्कालीन नागफनी थानाध्यक्ष सोमवीर सिंह के नाम पर 1993 को आवंटित किया गया था। यहां दूसरा भवन 25 सितंबर 1993 को नमो नारायण उपाध्याय के नाम से आवंटित था। दोनों किराएदारों ने जमीन को फ्री होल्ड कराने की कोशिश की थी। दोनों भवनों का निगम ने आवंटन निरस्त कर दिया है।
कचहरी रोड बेसिक शिक्षा कार्यालय के नजदीक भवन संख्या एक को 24 अक्तूबर 2008 को राजेश्वरी मौर्या के नाम आवंटित किया गया था। राजेश्वरी की मौत के बाद उनके पुत्र सिद्धार्थ आवास में रहते हैं। इस आवंटन को भी नगर निगम ने निरस्त कर दिया है। चक्कर का मैदान पर नजूल की भूमि पर स्थित नगर निगम के भवन संख्या सात को 1979 में तत्कालीन चिकित्सा एवं आबकारी मंत्री के पीआरओ मोहनलाल शर्मा के नाम से आवंटित किया गया था।
मोहनलाल की मौत होने पर उनके पुत्र मनोज के नाम पर आवंटन परिवर्तित किया गया था। चक्कर के मैदान पर बने भवन संख्या पांच को तत्कालीन सहायक आयुक्त न्याय एवं बिक्रीकर प्रथम को आवंटित किया गया था। सहायक आयुक्त द्वारा भवन खाली करने पर यह आवास विधायक दिनेश चंद्र रस्तोगी के नाम पर आवंटन मुख्य नगर अधिकारी ने परिवर्तित कर दिया।
विधायक की मौत के बाद उनके पुत्र वर्तमान में यहां रहते हैं। नगर निगम की संयुक्त आयुक्त ने आवंटन को नियम विरुद्ध मानते हुए भवन को खाली करने के निर्देश दिए हैं। चक्कर का मैदान भवन संख्या बी-1 भगवानदास शर्मा के नाम पर 1994 को आवंटित किया गया था। नगर निगम के अधिकारी का कहना है कि उन्होंने 1999 के बाद किराया भी जमा नहीं किया।
चक्कर का मैदान नगर निगम भवन संख्या ए-1 डॉ. गोमत के नाम पर आवंटित था। भवन खाली होने पर 1981 में अधिवक्ता उमाकांत शर्मा को आवंटित किया गया। 11 माह के अनुबंध के बाद अधिवक्ता ने निगम को आवास नहीं सौंपा। नगर निगम ने भवन को खाली करने के निर्देश दिए हैं।
भवन संख्या दो लेफ्टिनेंट कर्नल वीसी जोशी के नाम पर आवंटित था। उनकी मौत के बाद वर्तमान में पुत्रवधू वीना जोशी यहां रह रही हैं। मूल आवंटी की मौत के बाद नगर निगम ने भवन को खाली करने के लिए कहा है। इसी प्रकार भवन संख्या चार एसए फारूकी इंस्पेक्टर ओरियंटल फायर इंश्योरेंस के नाम पर 1972 में आवंटित था। मूल आवंटी का निधन हो गया है। चक्कर का मैदान भवन संख्या ए-4 1993 में कनक शर्मा के नाम से आवंटित था। 15 साल की अवधि समाप्त होने के कारण आवंटन निरस्त कर दिया गया है।
चक्कर का मैदान भवन संख्या छह डॉ. आरसी एस स्याना के नाम पर था, लेकिन अपने प्रभाव से दीपक मेहरा ने उसे अपने नाम पर 1985 में आवंटित कराया था। 11 माह बाद किराए का अनुबंध समाप्त हो गया। इस कारण नगर निगम ने दीपक मेहरा का आवंटन निरस्त कर दिया।