मुरादाबाद। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के रूठे नेताओं को मंच से मनाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि मौका मिला तो सांसद डॉ. एसटी हसन को और सम्मान दिया जाएगा। हालांकि जनसभा में एसटी हसन नहीं पहुंचे थे। वहीं आजम खां पर राजनीति का मरहम लगाने की कोशिश की। जनता के समक्ष यह जताने की कोशिश की कि दोनों नेता उनके लिए बहुत खास हैं।
सपा के सांसद डॉ. एसटी हसन टिकट कटने के बाद नाराज हो गए। उन्होंने पार्टी प्रत्याशी रूचि वीरा का प्रचार करने से मना कर दिया। अभी तक वह प्रचार में नहीं उतरे हैं। उन्होंने कहा था कि यदि अखिलेश यादव कहेंगे तो मंच साझा करूंगा। पहले वह घर आते थे। आएंगे तो उनको सम्मानित करूंगा। अखिलेश यादव भी सांसद को नहीं भूले। उन्होंने कहा है कि डॉ. एसटी हसन को अन्य सीट से लड़ने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने लड़ने से मना कर दिया। मौका मिला तो उनको सम्मानित किया जाएगा। इसी प्रकार आजम खां को भी अखिलेश यादव नहीं भूले। उन्होंने मंच से सवाल किया कि आजम खां पर झूठा केस दर्ज किया गया।
उनके साथ अन्याय हुआ कि नहीं। जनता ने जवाब दिया कि अन्याय हुआ। उसी प्रकार अन्याय हुआ जैसे दिल्ली के मुख्यमंत्री और झारखंड के मुख्यमंत्री के साथ हुआ है। आजम खां के बेटे और परिवार के अन्य सदस्यों को जेल में डाल दिया गया। इसका जवाब वोट से देना है। इंडिया गठबंधन के जीतने पर सभी के साथ न्याय किया जाएगा। अखिलेश यादव ने मंच के माध्यम से एक तरफ रूठों को मनाने का प्रयास किया। वहीं एसटी हसन और आजम खां के क्षुब्ध समर्थकों को अपने पाले में लाने की कोशिश की। पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि दोनों नेताओं का रामपुर और मुरादाबाद लोकसभा पर खासा प्रभाव रहा है। इसी कारण अखिलेश यादव दोनों नेताओं को ज्यादा नाराज नहीं करना चाहते हैं।