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Moradabad News: आठ माह पहले भी एबीएम अस्पताल पर हुई थी कार्रवाई

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मुरादाबाद/ठाकुरद्वारा।
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एबीएम अस्पताल पर आठ माह पहले स्वास्थ्य विभाग ने छापा मारा था। उस समय अवैध रूप से संचालित पैथोलॉजी लैब को सील किया गया था। इसके बाद मामला रफा-दफा हो गया और स्वास्थ्य विभाग ने उस पर ध्यान नहीं दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि एबीएम अस्पताल जिस सर्जन के नाम पर चल रहा था, वह ऑन कॉल डॉक्टर के रूप में तैनात थे और कभी-कभी आते थे।
उनके नाम पर कौन ऑपरेशन व डिलीवरी कर रहा था, किसी को नहीं पता। अस्पताल दो डॉक्टरों के नाम से चलाया जा रहा था। सीएचसी अधीक्षक डॉ. राजपाल सिंह का कहना है हर बिंदु की जांच की जा रही है। अप्रैल के अंत तक अस्पताल का पंजीकरण नवीनीकृत होना था, लेकिन तकरीबन 15 दिन पहले ही इसे रीन्यू किया गया है। तीन महीने तक अस्पताल बिना पंजीयन नवीनीकरण के चलता रहा। स्वास्थ्य विभाग ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
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निजी अस्पताल में ड्यूटी करती रही आशा, विभाग को भनक तक नहीं
अस्पताल में दुष्कर्म के मामले में डॉक्टर का सहयोग करने की आरोपी आशा मेहनाज कई माह से एबीएम अस्पताल में ड्यूटी कर रही थी। इसके बावजूद विभाग को भनक तक नहीं लगी। निजी अस्पताल में डिलीवरी कराने के लिए मेहनाज अन्य आशाओं से भी गर्भवती महिलाओं को लाने के लिए कहती थी। इसके बदले उसे अच्छा कमीशन मिलता था। इसका असर सरकारी अस्पताल की संस्थागत डिलीवरी पर भी पड़ा। इसके बावजूद विभाग की आंखें नहीं खुलीं।
शहनवाज के परिवार के जाने के बाद पूरा परिसर सील
एबीएम अस्पताल की ऊपरी मंजिल पर आरोपी शहनवाज का घर होने के कारण पूरा परिसर सील नहीं किया गया था। प्रशासन की मौजूदगी में स्वास्थ्य विभाग ने सिर्फ अस्पताल सील किया था। अब परिवार के वहां से जाने के बाद पूरा परिसर सील कर दिया गया है। मुख्य गेट बंद कर ताला लगा दिया गया है। आसपास के लोगों ने बताया कि उक्त अस्पताल करीब तीन वर्ष से चल रहा था। अस्पताल में काफी मरीज आते थे। डिलीवरी के केस सबसे ज्यादा आते थे।
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भाई व पत्नी के भी अस्पताल में ओपीडी करने की चर्चा
बीएएमएस डॉ. शहनवाज के पिता गांव के पुराने हकीम हैं। वह मूल रूप से थाना डिलारी के गांव राजपुर केसरिया का निवासी है। आरोपी डॉक्टर के चार भाई हैं। लोगों में चर्चा है कि शहनवाज के छोटे भाई शाने आलम ने कुछ समय पहले ही एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की है, जबकि आरोपी की पत्नी भी बीयूएमएस डॉक्टर है। चर्चा है कि अस्पताल में वह अपने भाई व पत्नी से भी ओपीडी कराता था। डिलीवरी के केस उसकी पत्नी ही देखती थी।
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