इस तरह खुली कर्मचारी की करतूत
घटना के तुरंत बाद मुकेश ने अपने दोस्त अरुण को कॉल की थी। इसके बाद उसने मोबाइल से कॉल डिलीट कर दी थी। पुलिस ने मुकेश के मोबाइल की कॉल डिटेल निकलवाई थी। जिसमें अरुण नाम के व्यक्ति को कॉल किए जाने की बात सामने आई जबकि मोबाइल में कॉल डिलीट थी। तब पुलिस ने मुकेश से कॉल के बारे में पूछताछ की। इसके बाद मुकेश टूट गया और उसने पूरी घटना बता दी।
रोजगार नहीं मिला तो रच डाली लूट की साजिश
बीए द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रहा मुकेश 2014 से दवा कारोबारी प्रिंस महल्होत्रा की फर्म में काम रहा है। अरुण ने बारहवीं तक पढ़ाई की। इसके अलावा देव कुमार बीकॉम कर रहा है। पुलिस विभाग में भर्ती होने के लिए तैयारी कर रहा है। अरुण ने भी पहले दवा फर्म में काम किया था लेकिन छह बाद बाद ही नौकरी छोड़ दी थी। अरुण और देव कुमार बेरोजगार हैं और आर्थिक तंगी में हैं। तीनों ने घटना से एक सप्ताह पहले लूट की योजना बनाई थी। मुकेश ने दोनों को बताया था कि वह बिलारी, कुंदरकी क्षेत्रों में मेडिकल स्टोरों पर दवाइयां पहुंचाता है रकम लेकर आता है। बिलारी में अरिल नदी पुल के पास अंधेरा रहता है। मेरी बाइक में लात मारकर गिरा देना। इसके बाद नोटों से भरा बैग लेकर भाग जाना।
लूट के बाद मनाया भाई का जन्म
घटना वाले दिन अरुण के छोटे भाई तरुण का जन्मदिन था। अरुण ने अपने भाई को बड़ा गिफ्ट देने का दावा किया था। घटना करने के बाद आरोपी ईंट भट्ठे पर पहुंचे। यहां आरोपियों ने नोटों को दूसरे बैग में रखा। इसके बाद आरोपी अपने अपने घर चले गए थे। अरुण ने घर पहुंचकर अपने भाई का जन्मदिन मनाया। आरोपी ने छोटे भाई को गिफ्ट और कपड़े दिए थे।
मौके पर छूट गया था बदमाश का हेलमेट
लूटपाट के दौरान अरुण का हेलमेट मौके पर ही छूट गया था। अरुण घर पहुंचा तो उसने बहन ने हेमलेट के बारे में पूछताछ की थी लेकिन वो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पाया था।