ठाकुरद्वारा। क्षेत्र के किसानों ने देश के प्रधानमंत्री और उत्तराखंड व यूपी के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर बारिश न होने के कारण 38 वर्ष पूर्व पड़े सूखे की याद दिलाई। किसानों की सिंचाई के लिए तुमड़िया डैम और भोगपुर डैम की क्षमता बढ़ाने के लिए मिटटी खुदवाने की मांग की। ठाकुरद्वारा के गांव रूपपुर टंडोला के पूर्व प्रधान चौधरी मलखान सिंह आदि ने एसडीएम के माध्यम से देश के प्रधानमंत्री, यूपी व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर कहा है कि वर्ष 1980 में भयंकर सूखा पड़ा था। सिंचाई के लिए पानी न मिलने के कारण ठाकुरद्वारा क्षेत्र के किसानो ंकी ुफसले सूख गई थी। मजदूर वर्ग बहुत परेशान था। उस समय उत्तराखंड यूपी का ही अंग था। लेकिन सूखे के कारण ठाकुरद्वारा और काशीपुर जसपुर के बीच जिला बंदी कर दी गई थी। क्षेत्र के लोग जब काशीपुर जसपुर में मजदूरी करने जाते थे। तो उनकी साईकिलें छीन ली जाती थी। तब तत्कालीन मुख्यमंत्री बनारसीदास गुप्ता ने पैसे के बदले अनाज देकर मजदूरों को काम दिया। प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने किसानों की सिंचाई की समस्या को देखते हुए तुमड़िया डैम खुदवाया था। जिससे यूपी की ठाकुरद्वारा और दलपतपुर क्षेत्र में नहरे बनवाकर किसानों को सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई। नहरे से पहले बारिश न होने पर दोनों क्षेत्रों के 300 गांव के कुएं और तालाव सूख जाते थे। क्योंकि इन गांव में 300 से 400 फीट गहरे बोरिंग होते है। लेकिन अभी तक क्षेत्र के किसानों की सिंचाई की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो सका है। ज्ञापन मे कहा गया है कि तुमड़िया डैम और भोगपुर डैम की जल संचय करने की क्षमता कम है। उनका कहना है कि यदि चार लाख घनमीटर मिटटी तुमड़िया डैम से खुदवा दी जाए। तो डैम की जल संचय की क्षमता बढ़ जाएगी। जिसका लाभ किसानों को मिलेगा। ज्ञापन में बांध की ऊचांई 16 फीट बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। किसानों का कहना है कि यदि पहले से इस ओर ध्यान दिया जाता तो इस समय बारिश न होने से किसानों को पानी की समस्या का सामना नहीं करना पड़ता।