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Moradabad News: एफआरके की प्रक्रिया न होने से 18 हजार क्विंटल धान 11 केंद्रों पर डंप

Wed, 05 Nov 2025 02:19 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
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ठाकुरद्वारा। क्षेत्र में किसानों से एक महीने में करीब 18 हजार क्विंटल धान की खरीद हो चुकी है लेकिन यहां से एक किलो धान भी राइस मिलों को नहीं भेजा जा सका है। इस स्थिति के चलते किसान परेशान है कई दिन में किसानों का धान नहीं तुल रहा है। जिससे किसान अपना धान सस्ते दामों में बिचौलियों और व्यापारियों को बेचने को मजबूर हैं। सरकारी केंद्र पर धान का मूल्य लगभग 2400 रुपये प्रति क्विंटल है लेकिन केंद्रों पर अब तक खरीदा गये धान का अभी तक उठान नहीं हो सका है। इसलिए किसान परेशान होकर अपना धान सस्ते दामों में 1800 और 1900 रुपये क्विंटल में व्यापारियों और बिचौलियों को बेच रहे हैं। 18 हजार क्विंटल धान राइस मिलों को नहीं जा रहा है। धान को चावल बनाने के लिए 13 राइस मिल निर्धारित किए गए हैं लेकिन इनकी एफआरके की प्रक्रिया लखनऊ से ऑनलाइन पूरी नहीं हो सकी है। पोर्टल भी नहीं खुल सका है। इस कारण राइस मिलर सरकारी केंद्रों का धान नहीं ले रहे हैं। इस स्थिति के चलते केंद्रों पर धान को रखने की जगह नहीं बची है। इससे सरकारी केंद्रों पर धीमी गति से धान की तोल की जा रही है। भाकियू ने भी इस मामले को समाधान दिवस में उठाया था। एसएमआई नरेंद्र सिंह ने बताया कि अक्तूबर माह तक करीब 18 हजार क्विंटल धान खरीदा जा चुका है जो अभी तक केंद्रों पर ही पड़ा हुआ है। धान खरीद के लिए मार्केटिंग विभाग के छह केंद्र नगर की मंडी समिति में और एक मानपुर साबित डिलारी में है। इसके अलावा चार पीसीएफ के केंद्र है। पीसीएफ के केंद्रों पर नाममात्र की खरीद हो रही है। अकेले मंडी समिति में बने केंद्रों पर सबसे अधिक 12000 क्विंटल धान खरीदा जा चुका है। यहां तोल होने के कारण किसान ज्यादा संख्या में पहुंच रह रहे हैं। मंगलवार को यहां 50 ट्रैक्टर ट्राॅलियां धान की धान की तुलने के लिए खड़ी हुई थी। गोपी वाला के किस दिशांत ने बताया कि वह अपनी मां के नाम की खतौनी से धान तुलने आए हैं तीन दिन बाद उनका नंबर आने की उम्मीद है। रतूपुरा के किसान राजपाल सिंह ने बताया कि वह रविवार से यहां पर अपने ट्रैक्टर ट्राली तुलने का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह कालेवाला के किसान उत्तम कुमार भी रविवार से यहां अपना धान तुलने की उम्मीद में बैठे हुए हैं। एसएमआई का कहना है कि धान को तोलने के बाद उसे रखने को जगह नहीं है। धान के उठने के बाद ही उसकी तौल में तेजी आएगी।
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