मुरादाबाद। पासिंग आउट परेड के बाद 18 महिला पुलिस अफसर अपराधियों की कमर तोड़ने को तैयार हैं। ट्रेनिंग के दाैरान इन महिला अफसरों को कानून व्यवस्था कायम रखने के तौर-तरीके सिखाने के साथ ही दंगाइयों और आतंकवादियों से निपटने का भी विशेष प्रशिक्षण दिया गया। नई अफसरों का कहना है कि अपराधियों के लिए समाज में कोई जगह नहीं है। अब मैदान में उतरकर पीड़ितों को इन्साफ दिलाने का समय आ गया है।
डॉ. बीआर आंबेडकर पुलिस अकादमी से पासआउट हुए 74 डीएसपी में 18 महिलाएं हैं। लखनऊ निवासी ऋषिका सिंह को बिजनौर में तैनाती मिली है। उन्होंने कहा कि बचपन में ही पुलिस अफसर बनने की ठानी थी। किसी महिला या युवती के साथ कोई अपराध होता था तो बहुत गुस्सा आता था। अब ऐसे अपराधियों को सबक सिखाएंगे।
लखनऊ की ही रहने वाली अमीषा ने बताया कि उनके पिता विनोद कुमार डीआईजी हैं। उन्होंने पिता को देखकर ही पुलिस में आने का फैसला किया था। पिता से बहुत कुछ सीखा है और अपराध व अपराधियों के बारे में भी काफी जानकारी है। उनका कहना है कि वह जहां भी तैनात रहेंगी, वहां ऐसा माहाैल बनाएंगी, जिससे अपराध करने से पहले कोई भी अपराधी साै बार सोचे।
डिप्टी एसपी बनीं गरिमा पंत ने कहा कि उनकी प्राथमिकता पीड़िताओं को त्वरित न्याय दिलाना रहेगा, जिससे उन्हें भटकना न पड़े। आकांक्षा पांडेय ने बताया कि उन्हें पुलिस अकादमी में बहुत कुछ सीखने को मिला है। अब वक्त आ गया है कि फील्ड में उतरकर अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा जाए। इशिका ने कहा कि उन्हें ट्रेनिंग में दंगाइयों से निपटने का प्रशिक्षण दिया गया है। बच्चों और महिलाओं के साथ अपराध करने वालों से सख्ती से निपटेंगी।