मिलक। रामलीला मंच पर मेघनाद वध के मंचन पर दर्शक रोमांचित हुए। नगर के श्रीराम लीला मंच पर मेघनाद वध के मंचन पर दर्शक रोमांचित हुए। कुंभकरण के युद्ध में मारे जाने पर मायामय रथ पर सवार मेघनाद और श्रीराम की सेना के बीच युद्ध होता है। लक्ष्मण,हनुमान, सुग्रीव जामवंत समेत सभी को वह व्याकुल कर देता है। वरदान के कारण वह किसी से मारे नहीं मरता है। इस बीच मेघनाद अजय होने का यज्ञ करने को चला जाता है। इस पर लक्ष्मण यज्ञ को विध्वंस करने सेना के साथ जाते हैं। जिस पर वह क्रोेधित होकर लक्ष्मण के त्रिशूल मारता है। जिसके वह दो टुकड़े कर देते हैं। काफी देर तक चले संग्राम पर वह नहीं मरता। तब सर्प राज (शेषजी) लक्ष्मण वीरोचित दर्प करके बाण चलाते हैं। तब वह मेघनाद की छाती में जाकर लगता है और वह मारा जाता है। श्रीराम की सेना में खुशी की लहर दौड़ पड़ती है।मेघनाद का वध होने पर सुलोचना विलाप करने लगती है।