बिलारी। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र सभागार में फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के तहत आयोजित पांच दिवसीय कृषक प्रशिक्षण शिविर के अंतिम दिन शनिवार की सुबह केंद्र के वैज्ञानिकों ने किसानों को नई कृषि तकनीक की जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र के प्रभारी डा. आरके सिंह ने किसानों को फसलों के अवशेष न जलाने की सलाह दी। वैज्ञानिक डा. हसन तनवीर ने मैंथा की फसल उत्पादन के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने मैंथा का तेल निकालने के बाद बचे अवशेष को मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए उपयोग करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। डा. सुखदेव सिंह ने किसानों को बागवानी का महत्व बताया और बागों में होने वाले फसल अवशेषों को बर्मी कंपोस्ट में बदलने के उपाय बताए। केंद्र के वैज्ञानिक डा. मोहन सिंह ने किसानों को खेतों की मिट्टी के नमूने लेने और मिट्टी की जांच कराने का महत्व बताया। प्रशिक्षण समापन पर प्रतिभागी किसानों को प्रमाण पत्र बांटे गए।