ठाकुरद्वारा। क्षेत्र में अब तक भ्रष्टाचार के आरोप में पुलिस प्रशासन के 12 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी यहां पर भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग रहा है।
क्षेत्र में सबसे पहले वर्ष 2005 में नायब तहसीलदार हर्ष चावला को विजिलेंस की टीम ने तहसील में रिश्वत लेते पकड़ा था। इसके बाद वर्ष 2006 में एंटी करप्शन की टीम ने एबीएसए केके राय को, 2006 में पूर्ति निरीक्षक प्रभाकर देव, 2010 में तहसीलदार राजीव उपाध्याय को, 2011 में कांस्टेबल शकील अहमद और उपनिरीक्षक महेंद्र पाल को, 2015 में पूर्ति निरीक्षक नरेश कुमार को रिश्वत लेते पकड़ा था।
2022 में बिजली विभाग के जेई पंकज शर्मा को, वर्ष 2023 में थाना डिलारी की उपनिरीक्षक पिंकी शर्मा को रिश्वत लेते एंटी करप्शन की टीम ने दबोच चुकी है। शुक्रवार को काजीपुरा के मासूम अली की शिकायत पर एंटी करप्शन की टीम ने जिलेदार को पकड़ा है।
14 मार्च 2024 को सिंचाई विभाग के जिलेदार 5000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुआ था। अब 31 अगस्त को एसडीएम के स्टेनो सचिन शर्मा को विजिलेंस की टीम ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा। संवाद
स्टेनो को हटाने की मांग कर रहे थे भाजपाई
ठाकुरद्वारा। रिश्वत लेते गिरफ्तार किए गए एसडीएम के स्टेनो सचिन शर्मा की कार्यप्रणाली से भाजपा कार्यकर्ता भी नाराज थे। भाजपाइयों ने करीब चार माह पहले स्टेनो को हटाने की मांग को लेकर एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन कर तत्कालीन एसडीएम अजय मिश्रा को ज्ञापन भी दिया था। इसमें मुख्य रूप से भाजपा के वरिष्ठ नेता अजय प्रताप सिंह शामिल थे।
हालांकि, एसडीएम ने सचिन शर्मा को दो दिन हटाने के बाद फिर अपने कार्यालय में बुला लिया था। मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया था जब सचिन शर्मा पर एक संघ के कार्यकर्ता के साथ अभद्र व्यवहार करने का आरोप लगा था। सचिन शर्मा मूल रूप से संग्रह विभाग में लिपिक के पद पर तैनात है, लेकिन उससे कई साल से एसडीएम के स्टेनो का कार्य लिया जा रहा था।
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एसडीएम कार्यालय में लगी भीड़
एसडीएम के स्टेनो सचिन शर्मा को रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने की जानकारी नगर में तेजी से फैल गई। मौके पर बड़ी संख्या में अधिवक्ता, नागरिक और अन्य लोग एसडीएम कार्यालय पर पहुंचे, लेकिन तब तक विजिलेंस बरेली की टीम सचिन शर्मा को लेकर वहां से जा चुकी थी। तहसील के कर्मचारी भी काफी संख्या में एसडीएम कार्यालय में एकत्रित हो गए।
ठाकुरद्वारा में अब तक धरे जा चुके 12 अधिकारी और कर्मचारी
ठाकुरद्वारा। क्षेत्र में अब तक भ्रष्टाचार के आरोप में पुलिस प्रशासन के 12 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है, लेकिन इसके बाद भी यहां पर भ्रष्टाचार पर अंकुश नहीं लग रहा है।
क्षेत्र में सबसे पहले वर्ष 2005 में नायब तहसीलदार हर्ष चावला को विजिलेंस की टीम ने तहसील में रिश्वत लेते पकड़ा था। इसके बाद वर्ष 2006 में एंटी करप्शन की टीम ने एबीएसए केके राय को, 2006 में पूर्ति निरीक्षक प्रभाकर देव, 2010 में तहसीलदार राजीव उपाध्याय को, 2011 में कांस्टेबल शकील अहमद और उपनिरीक्षक महेंद्र पाल को, 2015 में पूर्ति निरीक्षक नरेश कुमार को रिश्वत लेते पकड़ा था।
2022 में बिजली विभाग के जेई पंकज शर्मा को, वर्ष 2023 में थाना डिलारी की उपनिरीक्षक पिंकी शर्मा को रिश्वत लेते एंटी करप्शन की टीम ने दबोच चुकी है। शुक्रवार को काजीपुरा के मासूम अली की शिकायत पर एंटी करप्शन की टीम ने जिलेदार को पकड़ा है।
14 मार्च 2024 को सिंचाई विभाग के जिलेदार 5000 की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुआ था। अब 31 अगस्त को एसडीएम के स्टेनो सचिन शर्मा को विजिलेंस की टीम ने 50 हजार रुपये की रिश्वत लेते पकड़ा। संवाद