कोलकाता की घटना के बाद दूसरे राज्यों और जिलों में अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था के इंतजार किए जा रहे हैं। सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं और पुलिस कर्मियों की संख्या बढ़ाई जा रही है लेकिन मुरादाबाद के सरकारी अस्पताल की हालत में कोई सुधार नहीं किया गया है। जिला अस्पताल में चार महिला डॉक्टर, 60 महिला नर्स स्टाफ की तैनात हैं। अस्पताल में चार होमगार्ड दिन और चार होमगार्ड रात में तैनात रहते हैं। अस्पताल में सुबह से लेकर रात तक महिलाएं और युवतियों आती रहती हैं। कोई इलाज कराने तो कोई अपने मरीज को देखने आती हैं। जिला अस्पताल में वैसे तो 40 कैमरे लगे हैं लेकिन ट्रामा सेंटर और बैन वार्ड में एक भी कैमरा नहीं लगाया है। महिला अस्पताल में नौ महिला डॉक्टर, 30 महिला नर्स स्टाफ और आठ महिला कर्मचारी तैनात हैं, यहां केवल छह होमगार्ड तैनात रहते हैं। इनमें भी तीन की ड्यूटी दिन में और तीन होमगार्ड की ड्यूटी रात में रहती है।
- जल्द ही जिला अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के 18 पदों पर पूर्व सैनिकों की भर्ती की जाएगी। इससे जिला अस्पताल और स्टाफ की सुरक्षा मजबूत होगी। पूरे देश में डॉक्टर की सुरक्षा के लिए और सख्त कानून बनाना चाहिए।
डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल
महिला अस्पताल में प्रवेश के लिए जल्द ही पास सिस्टम शुरू किया जाएगा। इसके बाद भर्ती महिला के भाई और पति के अलावा कोई पुरुष अस्पताल में प्रवेश नहीं कर पाएगा। अस्पताल में लगे 26 सीसीटीवी कैमरों में से 15 कैमरों की निगरानी लखनऊ से की जा रही है।
डॉ. निर्मला पाठक, सीएमएस, महिला अस्पताल