मुरादाबाद। युवती से दुष्कर्म के मामले अदालत ने मुलजिम को दोषी करार देते हुए दस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई। जबकि 25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
कांठ थानाक्षेत्र में रहने वाली पीड़िता युवती के पिता ने 9 जून 2014 को थाने में तहरीर दी थी। जिसमें वादी ने बताया कि पिछले दो तीन माह से बेगमपुर निवासी आलम का उसके घर आना-जाना हो गया था। 9 जून की सुबह करीब दस बजे वादी और उसकी पत्नी बाहर गए थे। घर में सिर्फ बच्चे थे। तब आलम 17 वर्षीय बेटी को बहला-फुसलाकर कहीं ले गया। चार दिन बाद पीड़िता बिजनौर के स्योहारा थानाक्षेत्र के गांव पूरी में मिली। यहां आलम ने अपने मित्र इकरार के घर में उसे छिपा रखा था। युवती ने अपने बयानों में बताया कि आलम ने उसे शादी का झांसा दिया था और उसे इकरार के घर ले आया जहां दोनों ने उसके साथ दुष्कर्म किया। इस मामले में विवेचना के दौरान दुष्कर्म की धारा की धारा बढ़ाई थी। पुलिस ने आलम को गिरफ्तार कर भेज दिया था जबकि इकरार पुलिस की पकड़ से बाहर था। अदालत में दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया गया।
यह मुकदमा एफटीसी प्रथम योगेंद्र चौहान की अदालत में सुना गया। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक यादव ने बताया कि मुकदमे में फरार चल रहे आरोपी इकरार की पत्रावली प्रथक करते हुए अदालत ने आरोपी आलम की ओर से बचाव पक्ष की बहस सुनी। अदालत ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद आरोपी आलम को अपहरण और दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए उसे दस साल के कठोर कारावास की सजा के साथ उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।