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Mirzapur News: 83 वाहनों का फिटनेस फेल, खतरे में नौनिहालों की जान

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मिर्जापुर। जुलाई माह आते ही सभी स्कूल खुल गए हैं, पर स्कूलों में बच्चों को ले जाने वाले सभी वाहन अपना फिटनेस नहीं पास करा सके हैं। जिले में 83 ऐसे वाहन हैं, जो अनफिट हैं। इसमें कुछ वाहन सड़कों पर भी चल रहे हैं। अगर समय रहते ऐसे अनफिट वाहनों पर कार्रवाई नहीं की गई तो इन वाहनों से कभी भी किसी हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता है। यही नहीं स्कूली छात्रों को ले जाने वाले ऑटो और ई-रिक्शा भी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। ऑटो और ईरिक्शा में बाईं ओर राॅड नहीं लगाए हैं। जिससे खतरा बना रहता है।
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जिले में लगभग एक हजार के करीब निजी विद्यालय हैं। लगभग हर स्कूल में वाहन लगा रहता है। इन स्कूलों में लगे वाहनों के रजिस्ट्रेशन की बात करें तो जिले में 683 वाहनों का रजिस्ट्रेशन है, जो स्कूल द्वारा संचालित होते हैं। इसमें बस, मिनी बस, मैजिक, विंगर, क्रूजर आदि वाहन हैं। लगभग दो हजार के करीब ऑटो व ईरिक्शा हैं जो स्कूलों से बच्चों को लेकर आते और ले जाते हैं। ये स्कूल द्वारा संचालित नहीं होते हैं। स्कूल में लगे रजिस्टर्ड 683 वाहनों में 83 वाहनों का फिटनेस फेल है।
परिवहन विभाग ने इन वाहनों का संचालन करने वाले स्कूलों को नोटिस भेजा है। इन 83 वाहनों में कुछ तो विद्यालय मेें खड़े हैं, अधिकांश सड़कों पर चल रहे हैं। जिस कारण ये अनफिट वाहन स्कूल जाने वाले नौनिहालों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं। स्कूलों से बच्चों को ले जाने - ले जाने वाले ऑटो और ई-रिक्शा वालों की हालत तो और भी खराब है। छोटे बच्चों को लेकर स्कूल जाने वाले ये ऑटो और ई-रिक्शा चालक नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं।
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ऑटो चालक अपनी सीट पर बैठा रहे स्कूली छात्र
चुनार। नगर स्थित विभिन्न विद्यालयों में स्कूल बस के अलावा गली मुहल्लों से बच्चों को स्कूल पहुंचाने व स्कूल से उन्हें वापस घर ले जाने के लिए बड़े वाहनों के साथ छोटे वाहन भी लगाए गए हैं। इन छोटे वाहन चालकों द्वारा बच्चों की सुरक्षा का जरा सा भी ध्यान नहीं दिया जाता है। इसका सहज अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि चालक अपनी सीट पर ही नन्हें बच्चों को बैठाकर फर्राटे भरते हैं। चालक सीट पर बैठे बच्चे को पकड़ने के लिए कोई सपोर्ट न होने से अचानक ब्रेक लगने पर गिरने की पूरी आशंका बनी रहती है। ऑटो में पीछे की ओर भी कोई सुरक्षा के उपाय नहीं रहता है। इस लापरवाही के चलते कभी कोई अप्रिय घटना भी घटित हो सकता है।
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स्कूली वाहन में रहने चाहिए सुरक्षा के ये उपाय
मिर्जापुर। एआरटीओ विजय प्रकाश ने बताया कि पंजीकृत स्कूली वाहन पीले रंग के होने चाहिए। वाहन की खिड़की पर जाली होना चाहिए। जिससे छात्र हाथ या सिर बाहर न निकालें। बस में सीसी कैमरा और छात्रों को उतारने-चढ़ाने के लिए परिचालक होना चाहिए। वाहन पर स्कूल का नाम, चालक का नाम व मोबाइल नंबर रहना चाहिए। स्पीड मापक यंत्र लगा होना चाहिए। फर्स्ट एड बाक्स होना चाहिए।
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वर्जन
683 पंजीकृत स्कूली वाहनों में 83 अनफिट हैं। हर दो वर्ष पर फिटनेस टेस्ट कराना होता है। पांच जुलाई से 22 जुलाई तक ऐसे वाहनों के खिलाफ अभियान चलेगा। अनफिट वाहन सड़क पर छात्रों को लेकर जाते पाये गये तो कार्रवाई की जाएगी।
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विजय प्रकाश, एआरटीओ।
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