गलन और ठिठुरन ने लोगों को घरों में दुबकने को मजबूर कर रखा। सूर्यदेव के दर्शन को लोग आसमान पर निगाह लगाए रह।
जहां संक्रांति पर लोगाें ने गंगा में डुबकी लगाई, सूर्य को अर्घ्य भी दिया, लेकिन घने कोहरे के चलते सूर्य की किरणे धरती पर नहीं पड़ सकीं।
नए साल के प्रथम दिन से ही मौसम का मिजाज गड़बड़ाने से जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त हो गया है। सूर्यदेव के दर्शन न देने से जहां लोग ठिठुरते रहे, वहीं सर्दी के सितम के चलते मकर संक्रांति का पर्व फीका रहा।
न आसमानों में पतंगबाजी का नजारा दिखा और न ही बाजाराें में रौनक। लोगों ने उम्मीद लगा रखी थी कि मकर संक्राति के दिन सूर्यदेव का दर्शन होग।
लेकिन हाड़कपाऊ ठंड एवं कोहरे ने लोगों की उम्मीदाें पर पानी फेर दिया। ठंड से रेल, बस, यातायात एवं आम दिनचर्या पूरी तरह से प्रभावित रही।
शीतलहर से प्रमुख बाजाराें और सड़काें पर सन्नाटा पसरा रहा। कड़ाके की ठंड से बचने के लिए नगर में जगह-जगह लोग अलाव का सहारा लेकर गर्म होते देखे गए।