गंगा का जलस्तर तेजी से घट रहा है। पानी खतरे के निशान से काफी नीचे आ गया है। जलस्तर घटने के बाद खेत और सिवान में उठ रही दुर्गंध से संक्रामक रोग फैलने का खतरा बढ़ गया है। उधर, बुधवार को दोपहर में जलस्तर चार सेंटीमीटर की रफ्तार से घटते हुए खतरे के निशान से 18.4 सेंटीमीटर नीचे पहुंच गया। रात नौ बजे तक गंगा का जलस्तर 77.30 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 77.724 मीटर पर है।
उधर, जलस्तर में कमी के बाद अब सदर व चुनार तहसील क्षेत्र के बाढ़ प्रभावित तटवर्ती गांवों में लोगों को कचरा पड़ा रहने से संक्रामक रोग फैलने की आशंका सताने लगी है। छानबे क्षेत्र में गंगा नदी के जल स्तर घटने के बाद गंदगी व दुर्गंध से लोग परेशान हैं। लोगों का कहना है कि समय रहते दवा आदि का छिड़काव नहीं कराया गया तो संक्रामक रोग फैल सकता है। धान, बाजरा, उरद, मूंग, तिल व सब्जी की फसलें डूबने के बाद सड़ने लगी हैं। दुर्गंध से लोग परेशान हैं। क्षेत्रीय नागरिकों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दवा का छिड़काव कराने की मांग की है। कैलहट क्षेत्र में गंगा का जलस्तर कम होने से लोगों ने राहत की सांस ली है। बगही, भवानीपुर चंदापुर, गोविंदपुर ,जलालपुर माफी , केसवपुर, शिवपुर, रामरायपुर, चितरहा, कैलहट, बेला, पचेवरा सहित अन्य गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। ढाब क्षेत्र के सभी संपर्क मार्गों पर बाढ़ का पानी आ जाने से नाव का संचालन किया जा रहा है। जलस्तर कम होने व गंदगी के चलते लोगों को संक्रामक बीमारी फैलने का डर सता रहा है।