मिर्जापुर। वेदों ने न केवल संस्कृत भाषा को सजीव रखा, बल्कि भारतीय संस्कृति को भी संजीवनी दी है।
उक्त बातें मां विंध्यवासिनी के जन्मोत्सव के अवसर पर बुधवार को देर शाम विंध्य सेवा मंच शेर कोठी की तरफ से आयोजित वैदिक संस्कृति के उत्थान विषय पर आयोजित गोष्ठी में ज्योतिषाचार्य त्रियोगी नारायण उर्फ मिट्ठू मिश्रा ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वेदों के माध्यम से हमने धर्म, दर्शन, विज्ञान और समाज के विभिन्न पहलुओं पर गहन ज्ञान प्राप्त किया है। आज के समय में वेद की शिक्षाएं उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी हजारों साल पहले थीं। हमें वेदों के इस अमूल्य ज्ञान को संरक्षित करने के साथ ही इसे अगली पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। जालंधर के राजगुरु ने कहा कि वेदों की महत्ता को समझने और उसका पालन करने से हमारे जीवन में शांति, समृद्धि, और सद्गुणों का संचार होगा। गुजरात से आए रमेश मिश्र ने कहा कि संस्कृत भाषा और वेदों का उत्थान केवल एक भाषाई या सांस्कृतिक प्रयास नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज की आत्मा को जागृत करने का प्रयास है। हमें इसे एक जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाना चाहिए। इस दौरान उत्कर्ष दीक्षित, अनिल सिंह, देवेंद्र पांडेय, मधुराज तिवारी, देवेंद्र दीक्षित आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इससे पहले 101 ब्राह्मणों की ओर से शतचंडी पाठ किया गया। इस दौरान ओमप्रकाश मिश्र, रोहित त्रिपाठी, रतन कुमार मिश्र, विवेक दीक्षित, जतिन कसेरा, शिवम वर्मा, नागेश पांडेय, विनय तिवारी, ध्रुव सोनी व संजय सिंह आदि मौजूद रहे।