जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ गया है। डेंगू से मौत होने के साथ ही अब तक 600 से अधिक मरीज अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। नगर क्षेत्र में ही एक सेवानिवृत्त निरीक्षक की कुछ दिन पूर्व और एक एसआई के बैंक मैनेजर पुत्र की शुक्रवार को देर शाम डेंगू के चलते मौत हो गई। परिवार के लोग डेंगू पॉजिटीव होने से मौत की बात कह रहे हैं, परंतु स्वास्थ्य महकमा अभी भी जिले में डेंगू से मौत होने की पुष्टि नहीं कर रहा है। उधर, नगर के एक-दो मुहल्लों में लगभग हर घर में लोग बीमार हैं।
जिले में बीते 13 अगस्त को डेेंगू वार्ड में मरीजों की भर्ती शुरू हुई। इसके साथ ही जिले में डेंगू और उसके संभावित मरीजों के मिलने का सिलसिला शुरू हो गया। इसके बाद अस्पतालों में वार्डों की संख्या व बेड भी बढ़ाए गए। परंतु डेंगू के रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की तरफ से जरूरी कदम नहीं उठाए गए हैं।
नगर के कुछ मोहल्लों में तो करीब हर घर में लोग बीमार हैं। इसमें बसही और परमानपुर टेढ़वा मोहल्ले में हर घर में एक-दो लोग बीमार हैं। इनमें कई लोग डेंगू की चपेट में आग गए हैं। डेंगू की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो चुकी है। कजरहवा पोखरा निवासी कुंदन सोनकर ने बताया कि उनके पिता विश्राम सोनकर को डेंगू हो गया था। उन्हें इलाज के लिए प्रयागराज के स्वरूप रानी अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां कोमा में जाने के बाद उनकी मौत हो गई। पिता की मौत के बाद वे भी डेंगू की चपेट में आ गए। उनका छोटा भाई भी डेंगू की चपेट में आ गया।
उधर, डेंगू की चपेट में आने से दूसरी मौत मिर्जापुर पुलिस कंट्रोल रूप में तैनात एसआई विनोद चंद्र शुक्ल के 30 वर्षीय पुत्र मनोज प्रभाकर की शुक्रवार की शाम की मौत हो गई। एसआई विनोद चंद्र शुक्ल ने बताया कि उनके दोनों पुत्र बैंक मैनेजर हैं। बड़े पुत्र कमल दिवाकर यूनियन बैंक वासलीगंज में मैनेजर हैं। छोटा पुत्र मनोज प्रभाकर औराई में बैंक मैनेजर था। परिवार देवर्षि नगर कालोनी में मकान बनाकर रहता है। उन्होंने बताया कि छोटे पुत्र मनोज को चार दिन पहले बुखार आया। मिशन कंपाउंड के अस्पताल में इलाज कराने पर रिपोर्ट में डेंगू होने की बात सामने आई। इसके बाद स्टेशन और फिर जंगीरोड स्थित एक अस्पताल में मनोज को ले गए। वहां से रेफर किए जाने वाराणसी ले जाते समय रास्ते में मनोज की मौत हो गई।
मलेरिया अधिकारी संजय द्विवेदी ने बताया कि अब तक एलाइजा जांच से 13 डेंगू मरीज और कीट से संभावित 70 मरीज मिले हैं। डेंगू से एक भी मौत नहीं हुई है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ.राजेंद्र प्रसाद का कहना है कि जिले में डेंगू से मौत नहीं हुुई है। एक मौत पुलिसकर्मी की बताई गई, वो दूूसरे जिले में हुई है। जिन स्थानों पर बीमार लोगों के बारे में पता चल रहा है। वहां टीम भेजकर छिड़काव कराने का कार्य किया जा रहा है। साथ ही शिविर लगाकर मरीजों का उपचार भी किया जा रहा है। बसही के बाद परमापुर टेढ़वा में मरीजों के लिए शिविर लगाया जाएगा।
उधर, परमापुर टेढ़वा में पोखरे के प्रदूषित जल के चलते करीब हर घर में लोग बीमार हैं। मोहल्ले में लगभग 200 लोग बीमार हैं। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि ऐसा कोई घर नहीं है, जहां एक-दो लोग बीमार न हों। लोग बुखार, मलेरिया और डेंगू की चपेट में है। सभासद पति ने बताया कि पोखरे की सफाई के लिए कई बार पत्र लिखा गया, परंतु अब तक कुछ नहीं किया गया। पोखरे में गंदगी व मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के चलते ही लोग बीमार हो रहे हैं। मोहल्ला निवासी शकुंतला देवी ने बताया कि वे अपने पति और पुत्र के इलाज में एक लाख 80 हजार रुपये खर्च कर चुकी हैं। इलाज के लिए पति और पुत्र को वाराणसी के निजी अस्पताल में ले गए। कर्ज लेकर इलाज कराया गया है। बच्चे सब्जी व फल बेचते हैं। वर्तमान में पुत्री बीमार है, परंतु इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। मोहल्ले में स्थित पोखरे की गंदगी के चलते ही लोग बीमार हो रहे हैं।