मिर्जापुर। काली कमाई के लिए राइस मिलर ने न केवल फर्जी ढंग से खाते खुलवाए बल्कि मजबूर, मजदूर के खातों का भी इस्तेमाल किया। तीन से आठ लाख रुपये उनके एकाउंट में मंगाने और उसकी निकासी के लिए दो से तीन हजार रुपये दिया गया। छोटे एमाउंट के लिए पांच सौ से एक हजार दिए गए। धान खरीद के नाम पर करोड़ों के खेल का मामला तूल पकड़ने लगा है। फर्जीगिरी का शिकार हुए किसान लामबंद हो रहे हैं। गरीब और कमजोर तबके के लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए सरकार ने जन धन खातों का बड़ा अभियान चलाया। करोड़ो लोगों के बैंक खाते जीरो बैलेंस पर खोले गए। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि इनका इस्तेमाल राइस मिलर धानों की कालाबाजारी और पैसे के लेन देन में करेगा। गरीबों को हजार, दो हजार का लालच देकर उनके खाते में लाखों रुपये डलवाए गए और फिर उन्हें निकाल लिया गया। कुछ दिन के लिए उनके पासबुक और एकाउंट पर राइस मिलर के आदमियों का ही कब्जा रहा। बता दें कि इसके अलावा 415 खातों की पहचान की गई है जिसमें प्रत्येक के एकाउंट में तीन से आठ लाख रुपये भेजे गए और फिर निकाल लिए गए। जानकारी खाताधारकों को तब हुई जब उनके राशन कार्ड बंद हो गए। छानबे क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों अधवार, तिहली, सुपंथा, जोपा के सैकड़ों किसान, मजदूर, गरीब इस फर्जीगिरी के शिकार हुए हैं।