मिर्जापुर। प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र ने रविवार को शाम को पिपराडाड़ स्थित मां विंध्यवासिनी स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय का निरीक्षण कर व्यवस्था का जायजा लिया। इसके बाद अधिकारियों के साथ काॅलेज के सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक कर मेडिकल काॅलेज और अस्पताल में होने वाले विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली।
मुख्य सचिव ने शाम करीब छह बजे मेडिकल काॅलेज पहुंच कर सभागार में अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने अधिकारियों से अस्पताल में विद्यार्थियों व चिकित्सकों की संख्या के बारे में जानकारी ली। साथ ही उनके लिए हास्टल और आवास के साथ ही आने वाले समय में पड़ने वाली जरूरत के बारे में भी जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों से यह भी पूछा कि चौथे बैच के लिए कौन-कौन से कार्य जरूरी हैं। प्राचार्य डाॅ. आरबी कमल ने बताया कि अभी 160 छात्र और 140 छात्राओं के लिए हास्टल है। उन्होंने 300 बेड के हास्टल की आवश्यकता जताई। इसके अलावा डाॅक्टर और अन्य फैकेल्टी के कर्मियों के लिए भी आवास की जरूरत बताई। अस्पताल में बेड के बारे में पूछने पर बताया गया कि 155 बेड मंडलीय अस्पताल, 88 बेड जिला महिला अस्पताल, 40 बेड ट्रामा सेंटर है। लगभग 330 बेड है। जिलाधिकारी ने बताया कि जिला महिला अस्पताल में 88 बेड के भवन को गिराकर 120 बेड का अस्पताल बनाया जाना है। भवन गिराने की फाइल शासन के पास गई है। इस पर मुख्य सचिव ने कहा कि कि वह इसका जल्द निस्तारण कराएंगे। ताकि नया भवन बन सके। डेंगू के बारे में पूछने पर आयुक्त डाॅ. मुथु कुमार स्वामी बी ने बताया कि डेंगू के मरीजों के लिए अलग वार्ड बना है। दो माह से मरीजों का इलाज किया जा रहा है। अब तक कोई मौत अस्पताल में नहीं हुई है।
एसआईसी डाॅ. तरुण सिंह ने मंडलीय अस्पताल में बन रहे इंट्रीग्रेटेट लैब के बारे में जानकारी दी। इसके बाद मुख्य सचिव ने मेडिकल काॅलेज का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माणाधीन ऑडिटोरियम में मिट्टी भराई कर रही कार्यदायी संस्था राजकीय निर्माण निगम के अधिकारी को निर्देश दिया कि मिट्टी भराई न कर बेसमेंट बनवाएं। उसके ऊपर ऑडिटोरियम बनाएं। ताकि बेसमेंट का पार्किंग के रूप में उपयोग किया जा सके। मेडिकल काॅलेज जगह-जगह गड्ढों को भरकर समतल करने और परिसर के अंदर के सड़क निर्माण का निर्देश दिया। मुख्य सचिव को बताया गया कि सड़क निर्माण के लिए कार्यदायी संस्था नामित की गई है।