अदलहाट। नए साल की पूर्व संध्या पर बुधवार को श्री भवन में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। कई रचनाकार और साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। अध्यक्षता ज्योतिषाचार्य पं चंद्रमौली त्रिपाठी ने तथा संचालन एचपी त्रिपाठी ने किया। सर्वप्रथम आपरेशन सिंदूर पर अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए प्रमोद केशरी अतुल ने कहा आसमान पे थूकने वाला, खुद ही मुंह की खाएगा। बुरे कर्म का बुरा नतीजा, बेशक तू भी पाएगा। आयत तुम कुरान की पढ़ लो, पढ़ लो या कोई, कलमा, बोये तुम बबूल अगर हो, तो आम कहां से आएगा। इन पंक्तियों ने श्रोताओं की सोई उर्जा में जान फूंक दिया और लोग आतंकवाद के खिलाफ उठ खड़े होने को सोचने पर बाध्य हो गए। फिर अतुल ने नये वर्ष पर अपनी दुसरी कविता सुनाते हुए कहा कि ले लो सब कुछ मेरा। करो दिल से दूर अंधेरा। छू लो अंबर को जाओ, अब आया नया सबेरा। इस रचना पर श्रोता तालियां बजाने को विवश रहे। डा अरुण प्रकाश द्विवेदी ने अपनी भोजपूरी कविता सुनाते हुए यह कहकर लोगों को बांधे रखा किए बाबू मुल्लर हो,चल अइह गांवे। पंडित बतैले हंव,बुद्धे क फेर बा। स्वास्थ्य रही अच्छा, पर शिक्षा में देर बा। लोगो को ठहाका लगाने को मजबूर कर दिया। अमरेशचंद्र पाण्डेय ने कहा कि मन क्यों होता अधीर हदय में धीर धरा। श्रोताओं को गंभीर बना दिया और उन्हें खूब सराहा गया। संचालन कर रहे एच पी त्रिपाठी ने अपनी रचना सुनाते हुए कहा कि मैं जीवन में कुछ कर न सका। देखा था उनको गाड़ी में कुछ नीली पीली साड़ी में। इस रचना ने लोगों को खूब हंसाया। इस अवसर पर नीरज पांडेय, गोपाल दास गुप्ता, विजय शंकर तिवारी, आत्मा प्रसाद त्रिपाठी, विकास पांडेय नंदलाल सिंह, दिनेश सिंह, चंद्रलोकी, जटाशंकर लाल श्रीवास्तव, सूर्यभान सिंह आदि मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में कवियों को अंग वस्त्रम देकर सम्मानित किया गया।