लालगंज। मुरघुरा गांव में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन रविवार को कथावाचक डॉ अजय पांडेय महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का जीवंत वर्णन किया। इस दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो और हरि बोल के जयकारों से गूंजता रहा।कथावाचक ने श्रीकृष्ण की माखन चोरी, यशोदा मैया की ममता और बाल सुलभ चंचलता के प्रसंगों के माध्यम से बताया कि ईश्वर का सबसे सहज और स्नेहिल रूप बाल लीलाओं में ही प्रकट होता है। छप्पन भोग की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल भोग नहीं, बल्कि भक्त के पूर्ण समर्पण और निष्ठा का प्रतीक है। इसमें ईश्वर के प्रति प्रेम झलकता है। गोवर्धन पर्वत की महिमा बताते हुए महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र के अहंकार को चूर कर यह संदेश दिया कि भक्ति के सामने कोई भी अभिमान नहीं टिक सकता। गोवर्धन उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा करना भगवान की करुणा और भक्तवत्सलता का अनुपम उदाहरण है। पूतना वध प्रसंग में उन्होंने कहा कि भगवान की करुणा इतनी व्यापक है कि उन्होंने शत्रु पूतना को भी मां का दर्जा देकर मुक्ति प्रदान की। इससे यह संदेश मिलता है कि ईश्वर शत्रु में भी मातृत्व और भाव देख लेते हैं। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे रहे। कई प्रसंगों पर श्रोता भावुक हो उठे और आंखें नम हो गईं। इस अवसर पर रामकिंकर दुबे, रामलाल दुबे, रामाशंकर पटेल, कमला शंकर दुबे, वैभव दुबे, दिनकर दुबे सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।