मिर्जापुर। सिटी विकास खंड में विषम परिस्थितियों में महिलाओं और किशोरियों को सेनेटरी नैपकिंस उपलब्ध कराने वाले पंचायत उद्योग अघौली केंद्र में पिछले एक वर्ष से ताला लटक रहा है। फोरेंसिक आडिट की पेंच में जहां कामकाज पूरी तरह से ठप है। वहीं केंद्र में पड़े लाखों की मशीनें धूल फांक रही हैं। बताते चलें कि महिलाओं को ऋतुकाल के दौरान तमाम तरह की बीमारियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से वर्ष 1989 में उक्त पंचायत उद्योग की स्थापना कराई गई थी। सेनेटरी नैपकिंस उत्पादन प्रशिक्षण के लिए 12 से 18 महिलाओं के समूह का गठन कर प्रतिदिन यहां एक हजार सेनेटरी नैंपकिंस का उत्पादन किया जाता था। पूर्व माध्यमिक विद्यालय से लेकर स्वास्थ्य केंद्रों पर सस्ते दर पर नैपकिंस को उपलब्ध कराया जाता था। तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी प्रियंका निरंजन के कार्यकाल के दौरान लाखों रुपये की लागत से बाहर से मशीनें आदि भी मंगवाई गईं। सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि एक वर्ष से इस उद्योग केंद्र पर ग्रहण लगा है। रख-रखाव के अभाव में कमरों में लाखों की मशीनें बंद हैं। अध्यक्ष अरुण कुमार मिश्र की मानें तो पहले पंचायत उद्योग का ऑडिट होता था अब फोरेंसिक ऑडिट कराया जा रहा है। फाइलें निदेशालय को भेज दी गई हैं। जैसे ही कोई गाइड लाइन प्राप्त होगी केंद्र चालू करा दिए जाएंगे। कैंप का आयोजन कर वितरण किए जाते थे सेनेटरी नैपकिंस स्वच्छता अभियान के तहत पंचायत उद्योग अघौली की ओर से नवरात्र मेला सहित जिले में किसी भी बड़े कार्यक्रम में कैंप लगाकर महिलाओं को जागरूक करने के साथ ही सेनेटरी नैपकिंस उपलब्ध कराए जाते थे। इससे जहां उत्पादों की बिक्री होती रही, वहीं उद्योग से जुड़े लोगों को रोजगार उपलब्ध होता रहा।