धनुष यज्ञ में गुरु विश्वामित्र के साथ मौजूद राम ओर लक्ष्मण।- सोशल मीडिया।
- फोटो : Samvad
हलिया। सोनगढ़ा गांव में रामलीला के चौथे दिन शनिवार रात धनुषयज्ञ लीला और रावण-बाणासुर संवाद का मंचन किया गया। देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी। सीता के स्वयंवर में राजा जनक के आमंत्रण पर सभा में देश देशांतर के राजाओं का आगमन हुआ। राजा जनक ने सभी को अपना प्रण सुनाया। कहा कि जो भी शिवधनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाने में सफल होगा उसी से सीता का विवाह किया जाएगा। स्वयंवर में लंकापति रावण भी पहुंचे। उधर, राजा बलि के पुत्र बाणासुर को आकाशवाणी से रावण के स्वयंवर सभा में पहुंचने का समाचार मिला। रावण-बाणासुर संवाद सुनकर दर्शक रोमांचित हो उठे। अंतत: रावण स्वयंवर सभा के बीच से उठकर चला गया। इधर, सारे राजा धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाना तो दूर कोई उसे तिल भर हिला तक न सका। अधीर हो उठे जनक विलाप करने लगे। गुस्से में आकर सबको ताना देने लगे और पृथ्वी को वीरों से खाली बताया। यह सुनते ही वहां मौजूद लक्ष्मण क्रोधित हो गए। लक्ष्मण को राम ने शांत किया। फिर गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर श्रीराम ने शिवधनुष भंग कर दिया। धनुष के टूटते ही जय सियाराम के जयकारों से पंडाल गूंज उठा। इस मौके पर व्यास के रूप में शारदा प्रसाद तिवारी के अलावा कमेटी संयोजक अविनाश सिंह, अध्यक्ष प्रासू उर्फ प्रभात दुबे, धर्मेंद्र केसरी, हर्ष सिंह आदि मौजूद रहे।