विंध्याचल। मां विंध्यवासिनी मंदिर का गर्भगृह और भव्य तथा आकर्षक हो गया है। सोमवार को मां के विग्रह के चारों तरफ स्वर्ण जड़ित मेहराब और स्तंभ लगाने का काम पूरा हो गया। अब मां के दरबार में पहुंचने वाले भक्त गर्भगृह की भव्यता निहार सकेंगे। मां विंध्यवासिनी के गर्भगृह में चार किलो सोना और 51 किलो चांदी से निर्मित मेहराब तथा स्तंभ लगाने का काम सात जून को शुरू हुआ। बीच में बड़ी चुनौती सामने आई। रजत निर्मित पुराने मेहराब को काटकर निकालने के बाद स्वर्ण से बना नया मेहराब उसमें फिट नहीं हो रहा था। तोड़फोड़ के बगैर मेहराब फिट करने में दिक्कत पैदा हो गई।
मां का विग्रह प्राकृतिक रूप से पहाड़ पर स्थित है। ऐसे में विग्रह को सुरक्षित रखते हुए काम किया जाना था। जिला प्रशासन और श्री विंध्य पंडा समाज की बैठक में बाहर से विशेषज्ञों की टीम बुलाने का निर्णय लिया गया। इस काम को पूरा करने की जिम्मेदारी आईआईटी बीएचयू और मुंबई से आई एक्सपर्ट टीम को दी गई। बीते शनिवार से टीम ने मेहराब के दो स्तंभों को अत्यंत सावधानीपूर्वक लगाने का काम शुरू किया और उसी दिन दोनों स्तंभ लगा दिए गए। सोमवार को स्तंभ फिट करने का काम पूरा कर लिया गया। इस बीच जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन, एडीएम शिव प्रताप शुक्ल इस काम की लगातार निगरानी करते रहे। श्री विंध्य पंडा समाज की ओर से अध्यक्ष पंकज द्विवेदी, राजेश मिश्र और शिवानंद मिश्र की देखरेख में काम हुए।