लालगंज। प्रवासी कारीगरों ने फास्ट फूड का स्वाद बढ़ा दिया है। कोरोना संक्रमण के चलते महानगरों के पंच सितारा होटलों में काम करने वाले कारीगर गावं में जायके का सवाद बढ़ा रहे हैं। उनके हुनर से मिठाई की तेजी से बिक्री हो रही है। जिले के राजमार्ग सात पर स्थित तहसील स्तरीय बाजार लालगंज में फाइव स्टार होटलों में काम करने वाले कारीगरों की जोरदार चर्चा हो रही है। क्योंकि इनकारीगरों ने बाजार की मिठाईयों की दुकानों की रौनक बढ़ा दिया है। विकास खंड के कई गांव के नौजवान नौकरी करने मुंबई गए थे। लौटे प्रवासियों के मुताबिक वहां वेटर का काम शुरू किया लेकिन पढ़ें लिखे होने के कारण उसमें मन नहीं लगा। तो मिठाई, दोसा, इडली आदि बनाने वाले विशेषज्ञ कारीगरों के सहायक बनकर कारीगरी सीखने लगे। कुछ ही समय में उसमें पारंगत भी हो गए। इसके बाद वे बढ़ी पगार पर काम करने लगे। धीरे-धीरे कारीगरों का वेतन बढ़ने लगा। पैसा मिलने पर वे परिवार सहित मुंबई में रहने लगे। उन्होंने अपने बच्चों का दाखिला विद्यालयों में करवा दिया। प्रवासियों कामगारों के मुताबिक कोरोना के कारण देश में लाकडाउन लग गया। जिससे उनके जीवन के विकास पर ब्रेक लग गया। कोरोनावायरस के कारण कई होटल बंद हो गए । होटल मालिक ने कारीगरों को नौकरी से छुट्टी कर दिया। जिससे विवश होकर कारीगर परिवार सहित घर वापस लौट आए। गांव में आने के बाद उनके सामने परिवार का भरण पोषण की समस्या आ गई। इसलिए कारीगरों ने बाजार में मिठाई की दुकानों पर नौकरी तलाशी। उन्होंने मिठाई के दुकानदारों को बताया कि वे बड़े होटल में कारीगर थे। उनके पास एक से बढ़कर एक मिठाई बनाने की कला है। इडली डोसा, चाऊमीन समेत सभी तरह के व्यंजन बनाते हैं। उनके बातों से प्रभावित होकर दुकानदारों ने उनको नौकरी पर रख लिया। उनकी बनाई मिठाई बाजार में तो लोगों ने खरीदना शुरू कर दिया। उनके बनाए समोसे, छोले, डोसा, इडली समेत सभी तरह के व्यंजन लोकप्रिय होने लगे। क्षेत्र के मेढ़रा, बनवारी,अमहा, जगदीशपुर, पतुलकी गांव के कारीगर अब मुंबई के व्यंजनों को लालगंज में परोस रहे हैं।