मिर्जापुर। पूर्वांचल के जिलों को मिर्जापुर से जोड़ने वाले शास्त्री पुल का पाथवे क्षतिग्रस्त होने के बाद मरम्मत होने तक उस पर भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई है। यह रोक मंगलवार को भी जारी रही। बड़े वाहनों के लिए डायवर्जन लागू किया गया है। यह व्यवस्था पुल की मरम्मत होने तक जारी रहेगी। उधर, शास्त्री पुल पर भारी वाहनोें के आवागमन पर रोक के कारण भटौली पुल पर दबाव बढ़ गया है।
भटौली पुल पर वैसे तो छोटे माल वाहक वाहनों को आवागमन की अनुमति दी गई है, लेकिन उस पर से बसें और ट्रकें भी गुजर रही हैं। मिर्जापुर को पूर्वांचल के जिलों से जोड़ने वाले दुद्धी-लुंबिनी मार्ग पर स्थित शास्त्री पुल के पाथ वे 22 जून को देर रात बालू लादकर औराई की ओर जा रहा ट्रक चढ़ गया था। इससे पाथवे लगभग चार मीटर तक क्षतिग्रस्त हो गया था। उसमें ट्रक भी फंस गया। पुलिस ने क्रेन मंगाकर ट्रक को खिंचवाकर बाहर निकालवाया। इसके बाद 24 जून को दोपहर में पाथवे क्षतिग्रस्त होने का मामला तूल पकड़ने लगा तो अधिकारियों ने शास्त्री पुल पर आवागमन पर रोक लगा दी। हालांकि शाम को आवागमन शुरू करा दिया गया। इसके साथ ही सिर्फ दो, तीन तथा चार पहिया वाहनों के आवागमन की अनुमति दी गई और बसों तथा भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी गई। भारी वाहनों के लिए यातायात विभाग की तरफ से रूट डायवर्जन की व्यवस्था की गई है। इसके तहत भारी वाहन वाराणसी जाने के लिए बथुआ तिराहा, राबर्ट्सगंज तिराहा, बरकछा, चुनार, नरायनपुर तिराहा, टेंगरा मोड़, राजातालाब होते हुए वाराणसी जाएंगे। भटौली पुल से छोटे मालवाहक वाहनों के आवागमन की अनुमति दी गई है, परंतु भटौली पुल से रोडवेज बसों के अलावा ट्रकों को भी जाने दिया जा रहा है। इससे भटौली पुल तथा उस ओर जाने वाले मार्ग पर वाहनों का दबाव बढ़ गया है। उधर, शास्त्री पुल के क्षतिग्रस्त पाथवे के चारों तरफ बैरिकेडिंग कर उसे लोहे की चादर से ढक दिया गया है।
उधर, सेतु निगम के सहायक अभियंता रियाज हुसैन ने उप जिलाधिकारी को क्षतिग्रस्त पुल के बारे में पत्र लिखकर जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि लोडेड 14 चक्का ट्रक अनियंत्रित होकर शास्त्री पुल के पाथवे पर चढ़ गया। इससे बाईं तरफ पाथवे चार मीटर लंबाई में क्षतिग्रस्त हुुआ है। पाथवे का उपयोग पैदल और साइकिल सवार करते रहे हैं। निरीक्षण के दौरान यह तथ्य सामने आया कि ट्रक चढ़ने से सिर्फ पुल का पाथवे क्षतिग्रस्त हुआ है। मुख्य पुल को किसी प्रकार की क्षति नहीं पहुंची है। पाथवे की मरम्मत में 10 दिन का समय लग सकता है। मरम्मत का काम पूरा होने तक पाथवे के क्षतिग्रस्त हिस्से के चारों तरफ बैरिकेडिंग कराकर वाहनों का आवागमन चालू रखा जा सकता है।