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Mirzapur News: चार मुख्य आरक्षियों समेत सात पुलिसकर्मी निलंबित

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मिर्जापुर। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने गंभीर आरोप लगने पर जिले के विभिन्न थानों और पुलिस लाइन में तैनात चार मुख्य आरक्षियों और तीन आरक्षियों को निलंबित कर विभागीय जांच का आदेश दिया है। इसमें से दो लोगों के खिलाफ हाल ही में शिकायत मिलने पर कार्रवाई की गई है, पांच के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक ने लोकसभा चुनाव के दौरान आचार संहिता प्रभावी होने के कारण चुनाव आयोग को पत्र लिखा था।
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शहर कोतवाली क्षेत्र में आईपीएल की सट्टेबाजी में पुलिस ने तीन लोगों को पकड़ा था। इस मामले में पुलिस ने पूछताछ की गई तो पता चला कि मुख्य आरक्षी चंदन कुमार मिश्रा भी इन लोगों से वसूली करता है। मुख्य आरक्षी चंदन पहले शहर कोतवाली में तैनात था। वहां से हटने के बाद भी आईपीएल में सट्टेबाजी करने वालों से वसूली करता था। इसके बाद पुलिस अधीक्षक ने उसे निलंबित करने के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखा था। सक्तेशगढ़ पुलिस चौकी पर तैनात आरक्षी भृगुनाथ यादव ने मुकदमा दर्ज कराने आए युवक के साथी को पानी मांगने पर थप्पड़ मारकर धमकी दी थी। इस मामले में भी आरोपी पुलिसकर्मी को निलंबित करने के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखा गया था। ड्रमंडगंज थाने पर तैनात मुख्य आरक्षी विनोद कुमार यादव को चुनाव में किसी पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करने की गतिविधियों में लिप्त होने की शिकायत पर निलंबित करने के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखा गया था।
इसके अलावा पुलिस लाइन में तैनात आरक्षी आशीष कुमार सरोज पर महिला उत्पीड़न का मुकदमा दर्ज होने और चुनार किला पर तैनाती के दौरान आरक्षी सुधीर द्वारा किताब सप्लाई करने वाले से मारपीट करने पर मुकदमा दर्ज होने पर निलंबन के लिए पत्र लिखा गया था। इन पांचों पुलिसकर्मियों पर उस दौरान चुनाव आयोग की तरफ से कार्रवाई नहीं किए जाने पर पुलिस अधीक्षक ने अब निलंबन की कार्रवाई की है। उधर, हाल ही में राजगढ़ थाने पर तैनात मुख्य आरक्षी सुमित कुमार सिंह और प्रशांत कुमार राय के खिलाफ थाने में काम करने में लापरवाही बरतने की शिकायत मिलने पर उन्हें भी निलंबित किया गया है। पुलिस अधीक्षक अभिनंदन ने बताया कि सात पुलिसकर्मियों को गंभीर आरोपों के संज्ञान में आने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। उनके खिलाफ विभागीय जांच का आदेश दिया गया है। इनमें से कुछ के खिलाफ चुनाव आचार संहिता के दौरान कार्रवाई के लिए चुनाव आयोग को पत्र लिखा गया था।
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